बैठक के पहले दिन दो विशेष पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया। क्रिएटिव इकोनॉमी एंड पीपुल-टू-पीपुल कॉरपोरेशन: इनोवेशनपार्टनरशिप और आगे की राह विषय पर आयोजित पहली चर्चा की अध्यक्षता सचिव विवेक अग्रवाल ने की। इसमें समावेशी विकाससामाजिक एकजुटतासांस्कृतिक आदान-प्रदान और डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देने में रचनात्मक अर्थव्यवस्था की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया। वहींइंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी की अध्यक्षता में हुई दूसरी चर्चा में "कॉपीराइट और रचनात्मक अर्थव्यवस्था में नैतिक एआई: सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना" विषय पर मंथन हुआजिसमें कला के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक उपयोग और कॉपीराइट सुरक्षा पर जोर दिया गया।

बैठक के समापन पर भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाते हुए शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर कलाकारों ने एक मधुर संगीत कार्यक्रम पेश कियाजिसमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट संगीत परंपराओं की झलक दिखाई दी। इसके बाद "कलर्स ऑफ इंडिया" (भारत के रंग) नामक एक जीवंत नृत्य प्रस्तुति दी गईजिसमें देश के कई शास्त्रीय और लोक नृत्यों का प्रदर्शन कर विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की कलात्मक विविधता से रूबरू कराया गया। ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग के प्राथमिक क्षेत्रों पर आगे विचार-विमर्श के लिए यह बैठक शुक्रवार को भी होगी।

 

मेहमानों ने देखी काशी की विरासत, खानपान का लिया स्वाद

 

ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने आए विदेशी मेहमानों ने काशी की संस्कृति को काफी नजदीक से देखा और महसूस किया। उन्होंने सम्मेलन में लगे नौ स्टालों पर काशी की गुलाबी मीनाकारी, लकड़ी के खिलौने, ज्वेलरी समेत बनारसी साड़ी समेत एनी कारीगरी का अवलोकन किया। साथ ही जीआई उत्पादों की खरीदारी भी की। बैठक के दौरान काशी के खानपान का भी लुत्फ उठाया और उसकी सराहना की ।