वाराणसी। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर नमामि गंगे की टीम ने दशाश्वमेध घाट के सामने गंगा की लहरों पर जल योग कर संस्कृति, प्रकृति और जल संरक्षण का संदेश दिया। गंगा की अविरलता-निर्मलता तथा घाटों की स्वच्छता के संकल्प को दोहराते हुए सदस्यों ने जल में प्राणायाम, वृक्षासन, ताड़ासन, अनुलोम-विलोम, गरुड़ासन और सूर्य नमस्कार सहित विभिन्न योग क्रियाओं का प्रदर्शन किया तथा जल संरक्षण एवं विश्व कल्याण की कामना की। योग साधना के दौरान शिव स्तुति, गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, द्वादश ज्योतिर्लिंग श्लोक और गंगाष्टकम का पाठ कर वातावरण को आध्यात्मिक और भक्तिमय बना दिया गया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि गंगा और योग दोनों आत्मशुद्धि, शांति और मुक्ति के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि नदियां मानव सभ्यता की जननी रही हैं और वर्तमान समय में उनका संरक्षण हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने बताया कि जल योग के अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं। जल में वृक्षासन करने से वजन और तनाव कम होता है, ताड़ासन से चिड़चिड़ापन दूर होता है तथा गरुड़ासन से एकाग्रता बढ़ती है, जबकि प्राणायाम मन और रक्त की शुद्धि में सहायक है। इस अवसर पर काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला, महानगर सहसंयोजक सारिका गुप्ता, महानगर प्रभारी पुष्पलता वर्मा, महानगर सहसंयोजक बीना गुप्ता, ममता केसरी, माही केसरी, संदीप चतुर्वेदी, संजय जायसवाल, शालिनी श्रीवास्तव, पूजा यादव सहित सैकड़ों नागरिक उपस्थित रहे।
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