योग को बताया तनावमुक्त और दीर्घायु जीवन की कुंजी

 
 
 
वाराणसी। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ का अतिश सभागार योगमय हो उठा। "है भारत की यही पुकार, योग से स्वस्थ हो सारा संसार" के उद्घोष के बीच आयोजित कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु हीरा योगी ने सैकड़ों छात्र-छात्राओं, अधिकारियों और कर्मचारियों को शवासन, तड़ासन, वज्रासन, बालासन तथा भ्रामरी प्राणायाम सहित विभिन्न योग विधियों का अभ्यास कराया। इस वर्ष की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि ऐसी जीवन शैली है, जो बढ़ती उम्र में भी व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्रिय, मानसिक रूप से सजग और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाए रखती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वह आभासी मंच के माध्यम से 48 देशों के लोगों को योग प्रशिक्षण दे रहे हैं और लाखों लोग उनके योग सत्रों से लाभान्वित हो रहे हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रोफेसर वाड्ंछुग दोर्जे नेगी ने कहा कि योग का मूल उद्देश्य चित्त की विकृतियों को रोककर मन और शरीर में संतुलन स्थापित करना है।
 
   
उन्होंने कहा कि यम, नियम, धारणा, ध्यान और समाधि के माध्यम से भारत पूरी दुनिया को शांति और मानवीय मूल्यों का मार्ग दिखा सकता है। कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने कहा कि आज की तनावपूर्ण और भागदौड़ भरी जिंदगी में योग स्वयं से जुड़ने, आंतरिक शांति प्राप्त करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। कार्यक्रम की शुरुआत खेल अधिकारी शेम्फेल द्वारा मुख्य अतिथि को खतक और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित करने से हुई। इस अवसर पर संस्थान के सैकड़ों अधिकारी, कर्मचारी और छात्र-छात्राओं ने नियमित योग को जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।