चेहरा टेढ़ा होना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी और लड़खड़ाती आवाज को न करें नजरअंदाज
न्यूरो एवं स्पाइनल सर्जन डॉ. पी.एस. वर्मा से खास बातचीत—कम उम्र में स्ट्रोक, मिर्गी, भूलने की बीमारी और बिगड़ती नींद पर भी महत्वपूर्ण जानकारी
वाराणसी। सिरदर्द आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बेहद आम समस्या है। तनाव, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या से होने वाला सिरदर्द अक्सर सामान्य होता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में यही सिरदर्द किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत भी हो सकता है। सवाल यह है कि सामान्य सिरदर्द और खतरे की घंटी में अंतर कैसे किया जाए? अचानक चेहरा टेढ़ा हो जाए, हाथ-पैर में कमजोरी आने लगे या बोलने में परेशानी हो तो क्या करना चाहिए? क्या ब्रेन स्ट्रोक केवल बुजुर्गों तक सीमित है? मोबाइल, तनाव और नींद की कमी दिमाग को किस तरह प्रभावित कर रही है?
इन्हीं महत्वपूर्ण सवालों को लेकर परफेक्ट मिशन के प्रतिनिधि ने सुन्दरपुर क्षेत्र स्थित वीरेंद्र पुरम कॉलोनी के वर्मा न्यूरो एंड स्पाइनल सेंटर में न्यूरोएंडोस्कोपिक, न्यूरो एवं स्पाइनल सर्जन डॉ. पी.एस. वर्मा से विशेष बातचीत की। डॉ. वर्मा ने ब्रेन स्ट्रोक, सिरदर्द, मिर्गी, याददाश्त, नींद और युवाओं की बदलती जीवनशैली से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी साझा की।
हर सिरदर्द को मामूली समझना ठीक नहीं
डॉ. वर्मा के अनुसार तनाव, काम का दबाव, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या सिरदर्द के सामान्य कारण हो सकते हैं। इसलिए प्रत्येक सिरदर्द किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। हालांकि यदि सिरदर्द के साथ दृष्टि में परेशानी, उल्टी, शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी या अन्य असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
अचानक शुरू हुआ अत्यधिक तेज या सामान्य से बिल्कुल अलग सिरदर्द भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
चेहरा टेढ़ा, हाथ कमजोर या आवाज लड़खड़ाए तो तुरंत अस्पताल पहुंचाएं ब्रेन स्ट्रोक में समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। डॉ. वर्मा के अनुसार मस्तिष्क की रक्त वाहिका में रुकावट या रक्तस्राव के कारण स्ट्रोक हो सकता है। रक्त प्रवाह रुकने से इस्कीमिक स्ट्रोक और रक्तस्राव होने पर ब्रेन हेमरेज की स्थिति बन सकती है।
स्ट्रोक के प्रमुख चेतावनी संकेतों में शरीर के एक तरफ हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, चेहरा टेढ़ा होना तथा बोलने या समझने में अचानक परेशानी शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई दें तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार सीटी स्कैन, एमआरआई अथवा अन्य जांचों से स्थिति का आकलन किया जाता है।
स्ट्रोक से युवाओं को भी रहना होगा सतर्क
डॉ. वर्मा ने बताया कि कम उम्र के लोगों में भी स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। व्यायाम की कमी, अनियमित खानपान, पर्याप्त नींद का अभाव और लगातार तनाव जैसी जीवनशैली संबंधी स्थितियां स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
इसलिए केवल उम्र के आधार पर स्ट्रोक या अन्य गंभीर समस्या की संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। युवाओं को नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन और पर्याप्त नींद के साथ रक्तचाप, मधुमेह और अन्य जोखिम कारकों पर भी ध्यान देना चाहिए।
देर रात तक मोबाइल से बिगड़ सकती है नींद और दिनचर्या
डॉ. वर्मा के मुताबिक देर रात तक मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल नींद के समय और दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। पर्याप्त नींद न मिलने का असर अगले दिन एकाग्रता और कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने सलाह दी कि मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल आवश्यकता के अनुसार किया जाए और उसकी वजह से नींद तथा दैनिक दिनचर्या प्रभावित न होने दी जाए।
चाबी भूलना सामान्य, लेकिन रोजमर्रा के काम प्रभावित हों तो ध्यान दें
हर छोटी भूल को बीमारी समझना सही नहीं है। चाबी रखकर भूल जाना, वाहन कहां खड़ा किया था यह कुछ समय के लिए याद न रहना या किसी छोटी बात का ध्यान से निकल जाना सामान्य परिस्थितियों में हो सकता है।
चिंता तब बढ़ती है जब भूलने की समस्या लगातार बढ़ने लगे और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें। उम्र बढ़ने के साथ स्मृति संबंधी समस्या के अलावा अन्य लक्षण भी दिखाई दें तो चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी हो सकता है। वहीं युवाओं में लगातार तनाव, नींद की कमी और अव्यवस्थित दिनचर्या भी ध्यान एवं स्मरण क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
नींद में बार-बार परेशानी हो तो कारण जानना जरूरी
रात में बार-बार नींद टूटना, डरकर जागना या सोते समय असामान्य गतिविधियां लगातार बनी रहना भी ध्यान देने योग्य है। डॉ. वर्मा के अनुसार स्वस्थ नींद शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि प्रत्येक नींद संबंधी परेशानी को न्यूरोलॉजिकल बीमारी मानना उचित नहीं है। यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे और सामान्य जीवन प्रभावित होने लगे तो उसके कारण की जांच के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
मिर्गी के मरीज नियमित उपचार को न करें नजरअंदाज
मिर्गी को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां हैं। डॉ. वर्मा के अनुसार मिर्गी के कई कारण हो सकते हैं और सही उपचार के लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक है। उचित उपचार और नियमित निगरानी के साथ कई मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
मरीज को चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा नियमित रूप से लेनी चाहिए और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद नहीं करनी चाहिए। जब तक दौरे नियंत्रित न हों और चिकित्सक अनुमति न दें, तब तक वाहन चलाने, ऊंचाई पर जाने या ऐसी परिस्थितियों में काम करने से बचना चाहिए जहां अचानक दौरा आने पर दुर्घटना का खतरा हो।
दिमाग की सेहत के लिए अनुशासित दिनचर्या जरूरी
डॉ. वर्मा ने स्वस्थ जीवनशैली पर जोर देते हुए कहा कि खाने, सोने और जागने का समय यथासंभव नियमित रखना चाहिए। अनावश्यक स्क्रीन टाइम कम करने के साथ योग और व्यायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि मिर्गी, लकवा या मस्तिष्क और नसों से जुड़ी किसी भी समस्या में स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
शरीर के संकेतों को समझना ही सबसे जरूरी
डॉ. पी.एस. वर्मा की बातचीत का मुख्य संदेश यही रहा कि सिरदर्द, नींद, याददाश्त या शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर न तो अनावश्यक भय जरूरी है और न ही लापरवाही।
अचानक चेहरा टेढ़ा होना, हाथ-पैर में कमजोरी आना या बोलने में अचानक परेशानी जैसे लक्षण स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में समय गंवाए बिना तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
स्वस्थ मस्तिष्क के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, सीमित स्क्रीन समय और शरीर के असामान्य संकेतों के प्रति सजगता महत्वपूर्ण हैं। बीमारी के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचानना और उचित चिकित्सकीय सलाह लेना ही सुरक्षित स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
Comments (0)