नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सऊदी अरब की अपील के बाद चीन द्वारा ईरान से संपर्क किए जाने और हूती विद्रोहियों के हमले कम करने के लिए दबाव बनाए जाने की खबरों ने कच्चे तेल के बाजार को कुछ राहत दी है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 95 सेंट गिरकर 104.87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स 1.61 डॉलर की गिरावट के साथ 100.30 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। बाजार में इस गिरावट को चीन की कूटनीतिक पहल से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मिडिल ईस्ट की स्थिति अभी भी बेहद अनिश्चित बनी हुई है।

सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ा तनाव

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़ने की खबरों ने चिंता बढ़ाई है। हालिया हमले में रेड सी क्षेत्र में स्थित यानबू एक्सपोर्ट हब से जुड़ी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशन प्रभावित होने की बात सामने आई है।

इन घटनाओं के बीच सऊदी अरामको की यूरोपीय रिफाइनरी ग्राहकों को अगले महीने क्रूड सप्लाई को लेकर मुश्किलें बढ़ी हैं। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता और गहरी हुई है।

अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव

मिडिल ईस्ट के तनाव का असर अमेरिकी ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की खबर है, जबकि पेट्रोल की औसत कीमत भी ऊंची बनी हुई है।

रिफाइनिंग क्षमता में संभावित कमी और सप्लाई संबंधी चुनौतियों ने अमेरिकी बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। सामान्य तौर पर इस समय ईंधन कीमतों में नरमी देखने को मिलती है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की तस्वीर बदल दी है।

होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया की नजर

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आने की खबरों ने चिंता बढ़ाई है। शिपिंग डेटा के मुताबिक, यहां से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या सामान्य स्तर की तुलना में काफी कम हुई है।

होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक व्यवधान रहने की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार इस क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रख रहा है।

आगे क्या होगा?

आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में संघर्ष की स्थिति, सऊदी अरब की तेल आपूर्ति बहाल करने की क्षमता और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात पर निर्भर करेगी।

अगर समुद्री आवाजाही सामान्य होती है और तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा कम होता है, तो क्रूड की कीमतों पर दबाव घट सकता है। इसके उलट संघर्ष और सप्लाई बाधित होने की स्थिति में कीमतों में फिर तेजी आ सकती है।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू ईंधन कीमतों पर असर केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों से तय नहीं होता; रुपये की विनिमय दर, टैक्स और घरेलू मूल्य निर्धारण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।