नई दिल्ली: भारत का रक्षा निर्यात लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। अब भारत की पहचान केवल छोटे हथियारों और कलपुर्जों के निर्यातक के तौर पर नहीं, बल्कि ब्रह्मोस और आकाश जैसे हाईटेक मिसाइल सिस्टम बनाने और निर्यात करने वाले देश के रूप में भी मजबूत हो रही है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम का निर्यात 600 मिलियन डॉलर से अधिक पहुंचने की उम्मीद है। फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया और वियतनाम के साथ भी ब्रह्मोस को लेकर समझौते और सौदे आगे बढ़ रहे हैं।
🇵🇭🇮🇩🇻🇳 ब्रह्मोस की बढ़ती ग्लोबल डिमांड
फिलीपींस ब्रह्मोस का पहला विदेशी ग्राहक बना। इसके बाद दक्षिण-पूर्व एशिया में इंडोनेशिया और वियतनाम के साथ भी ब्रह्मोस को लेकर करार और बातचीत आगे बढ़ी है।
रक्षा सचिव ने ब्रह्मोस को भारत की उभरती रक्षा निर्यात कहानी का एक प्रमुख उदाहरण बताया है। मिसाइल का एयर-लॉन्च वर्जन Su-30MKI लड़ाकू विमान से भी इस्तेमाल किया जाता है।
🛡️ आकाश मिसाइल की भी बढ़ी मांग
ब्रह्मोस के साथ आकाश एयर डिफेंस सिस्टम भी विदेशी बाजार में भारत की बड़ी उपलब्धि बनकर उभरा है। DRDO द्वारा विकसित इस सिस्टम का उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड समेत भारतीय कंपनियां करती हैं।
आकाश का पहला विदेशी ग्राहक आर्मेनिया बना। अब इसके निर्यात का विस्तार ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान तक होने की जानकारी सामने आई है।
💰 रक्षा निर्यात ने बनाया रिकॉर्ड
भारत का कुल रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ पहुंच गया। यह 2024-25 के ₹23,622 करोड़ के मुकाबले 62.66 फीसदी अधिक है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद और सिस्टम निर्यात कर रहा है।
रक्षा क्षेत्र में सरकार ने आने वाले वर्षों में निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य भी रखा है।
🇮🇳 बदल रही भारत की डिफेंस पहचान
ब्रह्मोस और आकाश की विदेशी मांग भारत के रक्षा उद्योग में हो रहे बदलाव की तस्वीर दिखाती है। मिसाइल सिस्टम के साथ-साथ रडार, गाइडेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रोपल्शन और कमांड सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी भारतीय क्षमता का विस्तार हो रहा है।
यानी भारत अब केवल रक्षा उपकरण खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि उन्नत सैन्य तकनीक विकसित कर उसे वैश्विक बाजार में पहुंचाने वाला देश भी बन रहा है।
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