पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों के लिए तृणमूल कांग्रेस ने घोषित किए उम्मीदवार; असम की नगांव लोकसभा सीट से अब्दुल सलाम को टिकट

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर चल रही अटकलों पर तृणमूल कांग्रेस ने विराम लगा दिया है। पार्टी ने नंदीग्राम सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उम्मीदवार बनाने के बजाय संचिता प्रधान (डे) को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है। इसके साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि ममता बनर्जी इस उपचुनाव में नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ेंगी।

तृणमूल कांग्रेस ने रविवार को पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की। पार्टी ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया है।

नगांव लोकसभा सीट से अब्दुल सलाम उम्मीदवार

टीएमसी ने असम की नगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए अब्दुल सलाम के नाम की भी घोषणा की है। उम्मीदवार के ऐलान के साथ ही इस सीट पर चुनावी मुकाबले की तस्वीर स्पष्ट होने लगी है।

बागी गुट की अपील के बीच आया फैसला

नंदीग्राम को लेकर टीएमसी के भीतर भी राजनीतिक खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। पार्टी के बागी गुट की ओर से ममता बनर्जी से नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की अपील की जा रही थी। बागी खेमे ने कथित तौर पर यह भी कहा था कि यदि ममता नंदीग्राम से मैदान में उतरती हैं, तो वह अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगा।

हालांकि, पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व की ओर से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद ममता बनर्जी के नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ने की संभावनाओं पर विराम लग गया है।

नंदीग्राम से जुड़ा है ममता का पुराना राजनीतिक इतिहास

नंदीग्राम ममता बनर्जी की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस मुकाबले ने राज्य की राजनीति में व्यापक चर्चा बटोरी थी।

नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर सीट भी ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर से जुड़ी रही है। दोनों नेताओं के बीच चुनावी मुकाबले पश्चिम बंगाल की राजनीति में खास महत्व रखते हैं।

अब उपचुनाव पर टिकी नजरें

टीएमसी के उम्मीदवारों की घोषणा के बाद नंदीग्राम और रेजीनगर में चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना है। अब मुकाबला पार्टी के घोषित उम्मीदवारों और विपक्षी दलों के प्रत्याशियों के बीच केंद्रित होगा। उपचुनाव के परिणाम और उसके राजनीतिक प्रभाव पर सभी की नजर रहेगी।