22 अक्टूबर 2026 | प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मामले में चुनाव आयोग ने कार्रवाई तेज कर दी है। शुरुआती जांच में विसंगतियां सामने आने के बाद दो एसडीएम को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि एक कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पार्टी के अनुसार:
* 13,150 मतदाताओं के नाम कथित तौर पर बदले गए, जबकि उनके EPIC और सीरियल नंबर समान रहे।
* 884 मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया गया, जबकि पार्टी के मुताबिक वे संबंधित क्षेत्र में रह रहे हैं।
* लगभग 2,600 नए नाम ऐसे जोड़े जाने का दावा किया गया, जिनके संबंधित क्षेत्र में रहने पर सवाल उठाए गए।
कांग्रेस ने इन मामलों को मिलाकर 16,554 मतदाता प्रविष्टियों में कथित विसंगतियों का दावा किया है। ये पार्टी के आरोप हैं; सभी मामलों में गड़बड़ी साबित होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
चुनाव आयोग ने क्या कार्रवाई की?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के निर्देश पर हुई शुरुआती जांच के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है।
* दो एसडीएम को जिला मुख्यालय से संबद्ध किया गया।
* संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त की गईं।
* मामले में विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
* प्रदेश के सभी जिलों में मतदाता सूचियों की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।
अखिलेश यादव ने भी उठाया था मुद्दा
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और नामों में सुधार की मांग उठा चुके हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस और सपा ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है
अब आगे क्या होगा?
पूरे उत्तर प्रदेश में जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह की विसंगतियां हैं या नहीं। जांच में जिम्मेदारी तय करना, गलत प्रविष्टियों को सुधारना और पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार की रक्षा करना प्रमुख मुद्दे होंगे।
महत्वपूर्ण बात: मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों और जांच में सामने आए तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट और आधिकारिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होंगे।
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