प्योंगयांग। उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए पनडुब्बी से दागी जा सकने वाली क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया है। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के मुताबिक, बुधवार को देश के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में दो प्रकार की मिसाइलों का परीक्षण किया गया। इस घटनाक्रम से कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने पर जोर
उत्तर कोरिया ने इन मिसाइलों को रणनीतिक हथियार बताया है। इस शब्द का इस्तेमाल ऐसे हथियारों के लिए भी किया जाता है, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हो सकते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि परीक्षण के दौरान मिसाइलें किसी वास्तविक पनडुब्बी से दागी गईं या पानी के भीतर बने किसी परीक्षण प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया।
सरकारी मीडिया के अनुसार, परीक्षण का उद्देश्य पानी के भीतर युद्ध करने वाली प्रणालियों की तैयारी जांचना, नौसेना की रणनीतिक क्षमता बढ़ाना और देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना था।
दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा पर नजर
उत्तर कोरिया हाल के समय में अपनी मिसाइल क्षमताओं का लगातार प्रदर्शन कर रहा है। इससे पहले 20 सितंबर और 3 अक्टूबर को हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणालियों के परीक्षण की भी खबरें सामने आई थीं। प्योंगयांग का दावा है कि वह ऐसे हथियार विकसित कर रहा है, जो दक्षिण कोरिया और जापान की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को चुनौती दे सकते हैं।
दक्षिण कोरिया की सेना ने ताजा परीक्षण पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।
अमेरिका के साथ बातचीत पर भी गतिरोध
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया के साथ संबंधों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। वहीं, अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता भी लंबे समय से ठप है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत दोबारा शुरू करने की अपील के बावजूद अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
प्योंगयांग चाहता है कि अमेरिका अपनी कथित शत्रुतापूर्ण नीति में बदलाव करे और बातचीत के लिए परमाणु हथियार खत्म करने की पूर्व शर्त हटाए।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह परीक्षण?
पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइलें समुद्र के भीतर से हमला करने की क्षमता देती हैं, जिससे विरोधी देश के लिए उनके प्रक्षेपण स्थल का पता लगाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि उत्तर कोरिया इन प्रणालियों की परिचालन क्षमता बढ़ाता है, तो पूर्वी एशिया में सैन्य संतुलन और सुरक्षा रणनीतियों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, ताजा परीक्षण से उसकी वास्तविक परिचालन क्षमता कितनी बढ़ी है, यह उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं है।
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