135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं, 90 से अधिक ट्रेनें रद्द होने का दावा; आंध्र प्रदेश से ओडिशा और पूर्वी यूपी तक भारी बारिश का खतरा

अमरावती/विशाखापत्तनम। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ को लेकर तटीय राज्यों में चिंता बढ़ गई है। आंध्र प्रदेश में तूफान के प्रभाव से कई घरों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है। तेज हवाओं और भारी बारिश के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। वहीं, मौसम संबंधी चेतावनियों के बीच कई उड़ानों और ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है।

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत नौ राज्यों में सतर्कता बरतने की चेतावनी जारी की है। चक्रवात का असर तटीय इलाकों के साथ-साथ देश के कई अन्य हिस्सों में भी भारी बारिश और तेज हवाओं के रूप में दिखाई दे सकता है।

135 किमी प्रति घंटे तक पहुंची हवा की रफ्तार

मौसम विभाग के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, चक्रवात के आंध्र प्रदेश तट से टकराने की प्रक्रिया बुधवार तड़के शुरू हुई। तूफान के दौरान हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे रहने और झोंकों के साथ 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान बताया गया।

बताया गया कि चक्रवात का शुरुआती हिस्सा जमीन से टकरा चुका था और पूरी प्रक्रिया में कई घंटे लगने की संभावना थी। इस दौरान तटीय आंध्र प्रदेश, यानम और दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों में भारी बारिश तथा तेज हवाओं का खतरा बना रहा।

तेज हवाओं के कारण कच्चे मकानों, बिजली के खंभों, पेड़ों और कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है। निचले इलाकों में जलभराव और समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी जोखिम बढ़ सकता है।

नौ राज्यों में मौसम का अलर्ट

चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए कई राज्यों में प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

- आंध्र प्रदेश: तटीय इलाकों में तेज हवाओं, भारी बारिश और संपत्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा।

- ओडिशा: दक्षिणी और तटीय जिलों में भारी बारिश तथा निचले इलाकों में जलभराव की आशंका।

- तेलंगाना और छत्तीसगढ़: कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की संभावना।

- बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश: मौसम में बदलाव, गरज-चमक और बारिश की आशंका।

- झारखंड और अन्य प्रभावित क्षेत्र: स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सतर्कता और एहतियाती कदम उठाने की जरूरत।

पुडुचेरी में भी एहतियाती तैयारियों की जानकारी दी गई है। हालांकि, प्रत्येक राज्य और जिले के लिए जारी चेतावनी का स्तर अलग हो सकता है।

90 से ज्यादा ट्रेनें और कई उड़ानें रद्द होने की जानकारी

चक्रवात के संभावित असर के चलते परिवहन सेवाओं पर भी प्रभाव पड़ने की बात कही गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, रेलवे ने 90 से अधिक ट्रेनें रद्द की हैं, जबकि सुरक्षा कारणों से कई उड़ानें भी रद्द किए जाने की जानकारी है।

ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों को सलाह दी जाती है कि यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन या उड़ान की स्थिति संबंधित रेलवे अथवा एयरलाइन के आधिकारिक माध्यम से जांच लें। मौसम की स्थिति के आधार पर सेवाओं के समय और संचालन में बदलाव हो सकता है।

स्कूल-कॉलेज बंद, राहत की तैयारियां तेज

चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश, ओडिशा और झारखंड के कुछ क्षेत्रों में स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने की जानकारी दी गई है। प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।

राहत शिविरों, आपदा प्रबंधन टीमों और स्थानीय प्रशासन को संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रखने की जरूरत है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

दिल्ली-NCR और पूर्वी भारत में भी बारिश की संभावना

चक्रवात से जुड़ी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी बारिश और गरज-चमक की परिस्थितियां बन सकती हैं। दिल्ली-NCR सहित विभिन्न क्षेत्रों में मौसम बदलने की संभावना का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, चक्रवात का प्रभाव हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता। बारिश की तीव्रता, हवा की रफ्तार और मौसम संबंधी जोखिम स्थानीय परिस्थितियों तथा मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान पर निर्भर करते हैं।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

चक्रवात जैसी आपदा के दौरान प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देना और अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना जरूरी है। तेज हवाओं के समय पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर इमारतों से दूर रहें। जलभराव वाले रास्तों और उफनते नालों को पार करने की कोशिश न करें।

फिलहाल, चक्रवात से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा, राहत कार्यों और मौसम की लगातार निगरानी पर जोर है। आने वाले समय में स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि तूफान की तीव्रता कितनी तेजी से घटती है और बारिश का असर किन इलाकों में बना रहता है।