48 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी, 294 राहत-बचाव टीमें तैनात; कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट
भुवनेश्वर। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के संभावित प्रभाव को देखते हुए ओडिशा में प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ गया है। राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। सबसे बड़ी चिंता अचानक आने वाली बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड को लेकर है। मौसम की चुनौती इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि ओडिशा में बाढ़ का खतरा केवल राज्य में होने वाली बारिश तक सीमित नहीं है। पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और झारखंड के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश होने से भी ओडिशा की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। निचले इलाकों और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में रहने वाले करीब 48 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। इसके साथ ही संवेदनशील जिलों में राहत शिविरों और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।
आखिर कैसे ओडिशा में बाढ़ बढ़ा सकती है छत्तीसगढ़ और झारखंड की बारिश?
ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने चेतावनी दी है कि छत्तीसगढ़ और झारखंड के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश होने से राज्य के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
दरअसल, कई नदियां और उनकी सहायक धाराएं अलग-अलग राज्यों से होकर गुजरती हैं। ऐसे में किसी नदी के ऊपरी हिस्से में लगातार तेज बारिश होने पर बड़ी मात्रा में पानी तेजी से निचले क्षेत्रों की ओर बढ़ता है। यदि कम समय में नदी में पानी का प्रवाह बहुत अधिक बढ़ जाए, तो निचले इलाकों में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।
इसका सबसे ज्यादा असर नदी किनारे बसे गांवों, निचली बस्तियों, खेतों और सड़कों पर पड़ सकता है। कई जगहों पर जलभराव के कारण आवागमन बाधित होने के साथ-साथ फसलों और संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
यही वजह है कि ओडिशा प्रशासन के सामने केवल स्थानीय बारिश से निपटने की चुनौती नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्यों से आने वाले पानी और नदियों के बढ़ते जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने की भी जिम्मेदारी है।
ओडिशा के इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग की ओर से जारी चेतावनी के अनुसार, ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।
ऑरेंज अलर्ट वाले जिले: पुरी, गजपति, गंजाम, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरि में 12 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश होने का अनुमान बताया गया है।
येलो अलर्ट वाले जिले: बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, कटक और खुर्दा समेत 16 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में 7 से 11 सेंटीमीटर तक बारिश हो सकती है।
लगातार बारिश से पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ सकता है। वहीं, निचले इलाकों में पानी भरने और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को लेकर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं।
48 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी
चक्रवात और भारी बारिश से उत्पन्न संभावित खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने बड़े स्तर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना बनाई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 48 हजार लोगों को निचले इलाकों और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी है।
इस अभियान के तहत गजपति और नबरंगपुर जिलों में लगभग 11-11 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मलकानगिरि, गंजाम, कोरापुट, रायगड़ा, कालाहांडी और नुआपाड़ा जिलों में भी निकासी की तैयारी की गई है।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति गंभीर होने से पहले ही संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
135 स्थायी और 1600 अस्थायी आश्रय स्थल तैयार
राहत और बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर इंतजाम किए गए हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 135 स्थायी और लगभग 1600 अस्थायी आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं।
इसके साथ ही राहत और बचाव अभियान के लिए कुल 294 टीमें तैनात की गई हैं। इनमें एनडीआरएफ की 9, राज्य आपदा मोचन बल की 60 और अग्निशमन विभाग की 225 टीमें शामिल हैं।
इन टीमों को जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने, लोगों को सुरक्षित निकालने और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रखा गया है।
झारखंड में भी अलर्ट, रांची में दो दिन स्कूल बंद
चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव को देखते हुए झारखंड में भी मौसम को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रांची में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
झारखंड में भी नदियों के जलस्तर, निचले इलाकों में जलभराव और संभावित आपातकालीन परिस्थितियों पर नजर रखी जा रही है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में विशेष सतर्कता
छत्तीसगढ़ में भी संभावित भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। बस्तर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिलों में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
इन क्षेत्रों में भारी बारिश होने से स्थानीय नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। साथ ही, निचले इलाकों में पानी भरने और ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग बाधित होने की आशंका भी बनी रह सकती है।
छत्तीसगढ़ के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर ओडिशा की नदियों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में दोनों राज्यों के प्रशासन के लिए जलस्तर और बारिश की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।
तीन राज्यों में फ्लैश फ्लड का खतरा, प्रशासन अलर्ट
मौसम विभाग ने 28 अक्टूबर को ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में अचानक बाढ़ का मध्यम स्तर का जोखिम जताया है।
ऐसे में प्रशासन के सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं। भारी बारिश से निपटने के अलावा नदियों के जलस्तर की निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों की निकासी और राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, चक्रवात ‘अर्नब’ के संभावित प्रभाव ने ओडिशा समेत आसपास के राज्यों की चिंता बढ़ा दी है। यदि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश होती है, तो ओडिशा के पश्चिमी और उत्तरी इलाकों में बाढ़ का खतरा गंभीर हो सकता है। ऐसे में अगले कुछ दिन प्रशासन और प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहद सतर्क रहने वाले होंगे।
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