नई दिल्ली: कभी भिलाई में जूस की दुकान पर काम करने वाला सौरभ चंद्राकर आज देश के चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में मुख्य आरोपियों में शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में महादेव ऑनलाइन बुक घोटाले को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए 94 हजार करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन या कमाई का आरोप है।

जूस की दुकान पर करता था काम

सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। जांच में सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक, उसके परिवार की भिलाई में 'जूस फैक्ट्री' नाम से दुकान थी। सौरभ भी इस दुकान पर काम करता था। उसके चाचा के बयान के अनुसार, उसे हर महीने करीब 15 हजार रुपये मिलते थे।

दोस्त रवि उप्पल के साथ खड़ा किया सट्टेबाजी नेटवर्क

ED की जांच के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने मिलकर महादेव ऑनलाइन बुक नाम का सट्टेबाजी नेटवर्क तैयार किया। शुरुआत में यह कारोबार छोटे स्तर पर था, लेकिन दिसंबर 2020 के बाद इसका विस्तार तेजी से हुआ।

आरोप है कि इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, ताश और अन्य खेलों पर लोगों से ऑनलाइन दांव लगवाए जाते थे। धीरे-धीरे इस नेटवर्क का विस्तार कई राज्यों और विदेशों तक हो गया।

दुबई से ऑपरेट होता था पूरा नेटवर्क

जांच एजेंसी के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल दुबई से इस नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। ED का आरोप है कि इस कारोबार के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध धन अर्जित किया गया और उसे अलग-अलग माध्यमों से इधर-उधर किया गया।

200 करोड़ रुपये की शादी ने भी खींचा ध्यान

सौरभ चंद्राकर की दुबई में हुई भव्य शादी भी काफी चर्चा में रही। मीडिया रिपोर्टों में इस शादी पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया। शादी में बॉलीवुड की कई हस्तियों के शामिल होने और कार्यक्रमों में भारी खर्च की खबरें सामने आई थीं।

94 हजार करोड़ रुपये से अधिक के मामले की जांच

महादेव ऑनलाइन बुक मामले में ED बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े कथित लेनदेन का आंकड़ा 94 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। हालांकि, इस आंकड़े को अंतिम रूप से साबित हुई कमाई या जब्त रकम समझना सही नहीं होगा।

फिलहाल इस मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है। सौरभ चंद्राकर और अन्य आरोपियों से जुड़े आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।