नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर दिए गए विवादित बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों तक बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर खरगे के बयान पर नाराजगी जताई। वहीं, बीजेपी अब इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। खास तौर पर 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस की रैली से पहले सियासी माहौल गरमा गया है।
खरगे के बयान पर देशभर में बीजेपी का प्रदर्शन
मामला बिहार की राजधानी पटना का है, जहां एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने विवादित टिप्पणी कर दी। सभा के दौरान किसी व्यक्ति ने कहा कि मोदी नहीं जाएंगे, जिस पर खरगे ने जवाब देते हुए कहा, 'मोदी का बाप भी जाएगा।' इस बयान के सामने आने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
दिल्ली में खरगे के आवास के बाहर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर नारेबाजी और पुतला दहन के जरिए कांग्रेस के खिलाफ विरोध जताया गया। बीजेपी इस बयान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता का अपमान बता रही है। वहीं, इस मामले में पटना में शिकायत दर्ज कराए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
बीजेपी के निशाने पर कांग्रेस, चार मोर्चों पर घेरने की तैयारी
खरगे के बयान के बाद बीजेपी को कांग्रेस पर हमला तेज करने का मौका मिल गया है। पार्टी इस मुद्दे को लेकर चार स्तरों पर कांग्रेस को घेरने की रणनीति अपना रही है।
पहला मोर्चा—खरगे के बयान को लेकर राजनीतिक हमला: बीजेपी नेता लगातार कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर सवाल उठा रहे हैं और कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांग रहे हैं।
दूसरा मोर्चा—देशव्यापी विरोध प्रदर्शन: बीजेपी कार्यकर्ताओं के जरिए अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन कर इस मुद्दे को जनता के बीच उठाया जा रहा है।
तीसरा मोर्चा—एसआईआर के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरना: बीजेपी इस बयान को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर चल रही राजनीतिक बहस से जोड़कर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठा रही है।
चौथा मोर्चा—1 नवंबर की रैली से पहले सियासी दबाव: कांग्रेस की प्रस्तावित रैली से पहले बीजेपी इस विवाद को राजनीतिक बहस के केंद्र में बनाए रखने की कोशिश कर रही है, ताकि कांग्रेस को जवाब देने के लिए मजबूर किया जा सके।
कांग्रेस ने दी सफाई, बयान को संदर्भ से काटकर पेश करने का आरोप
दूसरी ओर, कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि खरगे के बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के मुताबिक, खरगे की टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस और उसके प्रमुख मोहन भागवत के संदर्भ में थी।
इस तरह बीजेपी जहां इसे प्रधानमंत्री के परिवार के अपमान का मुद्दा बता रही है, वहीं कांग्रेस बयान के संदर्भ पर जोर देते हुए बीजेपी पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगा रही है।
1 नवंबर की रैली से पहले बढ़ेगा सियासी टकराव?
खरगे के बयान ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। एक तरफ बीजेपी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमलावर है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे राजनीतिक विवाद बनाने की कोशिश बता रही है।
अब सबकी नजर 1 नवंबर की कांग्रेस रैली पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या बीजेपी इस मुद्दे को रैली से पहले और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाएगी या कांग्रेस अपने कार्यक्रम के जरिए एसआईआर समेत अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने में सफल होगी? फिलहाल, खरगे के बयान से शुरू हुआ विवाद देश की राजनीति में नया सियासी मोर्चा खोलता नजर आ रहा है।
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