नई दिल्ली। भारत में सोने की मांग हमेशा से काफी ज्यादा रही है। शादी-ब्याह से लेकर निवेश तक, सोना भारतीयों की पहली पसंद बना हुआ है। लेकिन अब भारत में सोना आयात करने के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों तक स्विट्जरलैंड भारत के लिए सोने का प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा, लेकिन अब संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।

टैक्स में मिलने वाली छूट, भारत-UAE व्यापार समझौते के तहत मिलने वाले विशेष टैरिफ लाभ और देश में सोना शुद्ध करने की बढ़ती क्षमता ने आयातकों की रणनीति बदल दी है। अब भारतीय आयातक केवल शुद्ध सोने की छड़ों के लिए स्विट्जरलैंड पर निर्भर रहने के बजाय दूसरे स्रोतों से भी सोना मंगाने पर जोर दे रहे हैं।

स्विट्जरलैंड की जगह UAE क्यों बन रहा पसंद?

भारत लंबे समय से स्विट्जरलैंड से बड़े पैमाने पर शुद्ध सोना आयात करता रहा है। स्विट्जरलैंड की पहचान सोने को शुद्ध करने और उच्च गुणवत्ता वाली गोल्ड बार तैयार करने के लिए रही है।

हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में परिस्थितियां बदलने लगी हैं। UAE ने वैश्विक सोना व्यापार में अपनी मजबूत स्थिति बनाई है। दुबई सोने के कारोबार का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय केंद्र है, जहां दुनिया के विभिन्न देशों से सोने की खरीद-बिक्री होती है।

भारत और UAE के बीच व्यापार समझौते ने भी इस कारोबार को नई दिशा दी है। पात्र आयात पर मिलने वाले रियायती शुल्क का लाभ उठाकर भारतीय आयातक अपनी लागत कम करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, यह लाभ संबंधित समझौते की शर्तों, सोने की श्रेणी और लागू आयात नियमों पर निर्भर करता है।

भारत की रिफाइनिंग क्षमता ने कैसे बदली तस्वीर?

भारत में सोने के आयात के स्रोतों में बदलाव की एक बड़ी वजह घरेलू रिफाइनिंग उद्योग का विस्तार भी है।

पहले भारत बड़ी मात्रा में ऐसा सोना आयात करता था, जिसे विदेशों में पहले ही शुद्ध करके तैयार किया जा चुका होता था। लेकिन अब भारतीय रिफाइनर कच्चे या आंशिक रूप से शुद्ध सोने को आयात करके देश में ही उसे शुद्ध करने की क्षमता बढ़ा रहे हैं।

सोने के इस कच्चे या आंशिक रूप से शुद्ध रूप को 'डोरे गोल्ड' कहा जाता है। इसे रिफाइनिंग प्रक्रिया से गुजारकर उच्च शुद्धता वाला सोना बनाया जाता है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) के लीड मेटल्स एनालिस्ट देबाजीत साहा के हवाले से बताया गया है कि भारत की रिफाइनिंग क्षमता बढ़ने के साथ डोरे गोल्ड की आपूर्ति के लिए मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई है। इससे विदेशों में पहले से शुद्ध किए गए सोने पर भारत की निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।

क्या इससे भारत को होगा फायदा?

सोने के आयात के स्रोतों में विविधता आने से भारत को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं।

पहला, आयात के विकल्प बढ़ेंगे। भारत को सोने की आपूर्ति के लिए किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

दूसरा, घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। देश में रिफाइनिंग क्षमता बढ़ने से भारतीय कंपनियों को सोने के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के अधिक अवसर मिल सकते हैं।

तीसरा, लागत में कमी की संभावना। व्यापार समझौतों के तहत पात्र आयात पर मिलने वाली शुल्क संबंधी रियायतों से आयातकों को फायदा हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत सोने की कीमत, प्रीमियम, परिवहन लागत और लागू शुल्क पर निर्भर करेगी।

क्या स्विट्जरलैंड की भूमिका खत्म हो जाएगी?

ऐसा मानना अभी जल्दबाजी होगी। स्विट्जरलैंड वैश्विक सोना रिफाइनिंग और व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। भारत के आयात में UAE की बढ़ती भूमिका का मतलब यह नहीं है कि स्विट्जरलैंड से सोने की आपूर्ति समाप्त हो जाएगी।

बल्कि तस्वीर यह है कि भारत अपनी जरूरतों के अनुसार आयात के स्रोतों और तरीकों में बदलाव कर रहा है। एक तरफ UAE के साथ व्यापारिक संबंध महत्वपूर्ण हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ घरेलू रिफाइनिंग उद्योग भी मजबूत हो रहा है।

निष्कर्ष: भारत के सोना आयात की कहानी अब केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि सोना किस देश से आ रहा है। असली बदलाव यह है कि भारत अपनी आपूर्ति शृंखला को अधिक विविध बनाने और घरेलू रिफाइनिंग क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। UAE की बढ़ती भूमिका इसी बदलती रणनीति का एक अहम हिस्सा है।