रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों को मिलेगा अलग आरक्षण का मौका; शेयरधारक और रिटेल कैटेगरी में आवेदन संभव, लेकिन शेयर मिलने की गारंटी नहीं।
मुंबई। मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) को लेकर निवेशकों के बीच चर्चा तेज है। 21 अक्टूबर 2026 से सार्वजनिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने वाले इस आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के पात्र शेयरधारकों के लिए ₹2,500 करोड़ तक के शेयर आरक्षित रखे जाने की जानकारी सामने आई है। इस विशेष कोटे के कारण पात्र निवेशकों को शेयर पाने के लिए एक अतिरिक्त श्रेणी में आवेदन करने का अवसर मिल सकता है।
₹30,213 करोड़ का IPO, निवेशकों की नजर अलॉटमेंट पर
दी गई जानकारी के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के इस आईपीओ का कुल आकार ₹30,213 करोड़ है और इसके शेयरों का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर निर्धारित किया गया है। निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा एंकर बुक में मिली भारी मांग से भी लगाया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग ₹8,110 करोड़ के आवंटन के मुकाबले करीब ₹2.5 लाख करोड़ की बोलियां प्राप्त हुईं।
हालांकि, एंकर निवेशकों की मांग और आम निवेशकों को मिलने वाले शेयरों का आवंटन अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए भारी मांग को सभी श्रेणियों में समान अलॉटमेंट की गारंटी नहीं माना जा सकता।
कौन उठा सकता है शेयरधारक कोटे का लाभ?
जियो आईपीओ के शेयरधारक आरक्षण के तहत उन पात्र व्यक्तिगत निवेशकों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) को आवेदन का अवसर मिल सकता है, जिनके पास निर्धारित कट-ऑफ तारीख यानी 14 अक्टूबर 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर थे।
इस व्यवस्था के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज का एक शेयर रखने वाले पात्र निवेशक भी निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन आवेदन कर सकते हैं। वहीं, 14 अक्टूबर या उसके बाद RIL के शेयर खरीदने वाले निवेशक इस विशेष कोटे के लिए पात्र नहीं होंगे।
T+1 सेटलमेंट व्यवस्था के अनुसार, कट-ऑफ तारीख तक शेयरों का पात्र स्वामित्व सुनिश्चित करने के लिए 13 अक्टूबर 2026 को खरीदारी का अंतिम नियमित कारोबारी दिन बताया गया है। हालांकि, निवेशकों को अपनी पात्रता की पुष्टि आईपीओ के आधिकारिक ऑफर दस्तावेजों और ब्रोकर के निर्देशों से करनी चाहिए।
क्या एक ही PAN से दो आवेदन कर सकते हैं?
पात्र शेयरधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे नियमों के अनुसार शेयरधारक आरक्षण श्रेणी और सामान्य रिटेल श्रेणी में अलग-अलग आवेदन कर सकते हैं। यानी पात्रता होने पर निवेशक दो अलग-अलग श्रेणियों के आवंटन पूल में भाग लेने का अवसर पा सकते हैं।
लेकिन दोनों श्रेणियों में आवेदन करने का अर्थ यह नहीं है कि निवेशक को शेयर मिलना तय है। प्रत्येक श्रेणी में आवेदन की संख्या, उपलब्ध शेयरों और अंतिम आवंटन प्रक्रिया के आधार पर ही शेयर मिलेंगे। एक ही श्रेणी में डुप्लिकेट आवेदन करने से बचना चाहिए और आवेदन संबंधी शर्तों का पालन करना जरूरी है।
कब होगा अलॉटमेंट और लिस्टिंग?
प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, आईपीओ के शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर 2026 को और शेयर बाजार में लिस्टिंग 28 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। निवेशकों को इन तारीखों और संबंधित समयसीमा में किसी बदलाव के लिए कंपनी तथा स्टॉक एक्सचेंज की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।
क्या शेयरधारक कोटे से शेयर मिलने की संभावना बढ़ेगी?
शेयरधारक आरक्षण का मुख्य लाभ यह है कि पात्र निवेशक सामान्य रिटेल श्रेणी के अलावा एक अलग श्रेणी में भी आवेदन कर सकते हैं। इससे उन्हें दो अलग-अलग आवंटन प्रक्रियाओं में भाग लेने का अवसर मिलता है। फिर भी, वास्तविक अलॉटमेंट की संभावना संबंधित श्रेणी में मांग और उपलब्ध शेयरों पर निर्भर करेगी।
निवेशकों के लिए जरूरी बात: आईपीओ में आवेदन करने से पहले प्राइस बैंड, लॉट साइज, न्यूनतम निवेश राशि, पात्रता, कट-ऑफ तारीख और अलॉटमेंट नियमों की आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि करें। किसी भी आरक्षण को शेयर मिलने की पक्की गारंटी न समझें।
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