रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की तेल आपूर्ति में सुधार की उम्मीदों के बीच सोमवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 81 सेंट गिरकर 103.06 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड 89 सेंट की गिरावट के साथ 99.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद बाजार में सऊदी तेल निर्यात में सुधार पर ध्यान बना हुआ है।

हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया। इसके अलावा, लाल सागर के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र यानबू में अरामको की एक सुविधा को निशाना बनाए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है। इन घटनाओं के बाद सऊदी अरामको ने तेल निर्यात के मार्गों में बदलाव किया है।

चीन की कूटनीतिक सक्रियता पर नजर

सऊदी अरब की अपील के बाद चीन ने ईरान से हूती हमलों को रोकने में मदद करने का आग्रह किया है। इससे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कूटनीतिक प्रयासों की चर्चा तेज हुई है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बरकरार है। बाजार में तेल की कीमतों पर आपूर्ति संबंधी खबरों के साथ-साथ संभावित कूटनीतिक प्रगति का भी असर पड़ रहा है।

दिल्ली में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया।

दिल्ली पेट्रोल

₹102.12

प्रति लीटर

स्थिर

दिल्ली डीजल

₹95.20

:21 सितंबर 2026 के प्रकाशित शहरवार ईंधन दर आंकड़े। क्या क्रूड सस्ता होने से पेट्रोल-डीजल भी सस्ता होगा?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर भारत में पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों पर तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है। घरेलू ईंधन कीमतों पर कच्चे तेल की लागत के अलावा कर, विनिमय दर और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीतियां भी असर डालती हैं। इसलिए क्रूड में गिरावट के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं।