तीन बड़े सर्वे में विपक्ष को बढ़त का अनुमान, 120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए चाहिए 61 सीटें; अलग सर्वे में भी नेतन्याहू को स्पष्ट बहुमत नहीं

तेल अवीव। इजराइल के आम चुनाव को लेकर जारी एग्जिट पोल ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तीन प्रमुख मीडिया संस्थानों के अनुमानों में विपक्षी गठबंधन सत्ताधारी खेमे से आगे दिखाई दे रहा है। हालांकि, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है, लेकिन गठबंधन के बहुमत से दूर रहने की आशंका जताई गई है।

इजराइल की 120 सदस्यीय संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। एग्जिट पोल के मुताबिक, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन के लिए इस आंकड़े तक पहुंचना आसान नहीं दिख रहा। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन को बढ़त मिलने के बावजूद सरकार गठन का रास्ता पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

तीन बड़े एग्जिट पोल में विपक्ष को बढ़त

इजराइल के तीन प्रमुख प्रसारकों—चैनल 12, चैनल 13 और सार्वजनिक प्रसारक कान (KAN)—के एग्जिट पोल में विपक्षी गठबंधन को सत्ताधारी खेमे से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

अनुमानों के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन को करीब 50 सीटें मिल सकती हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन के खाते में 52 से 53 सीटें जाने का अनुमान है। अरब पार्टियों को 17 से 18 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।

यदि ये अनुमान वास्तविक परिणामों में बदलते हैं, तो नेतन्याहू के लिए बहुमत जुटाना बड़ी चुनौती होगी। वहीं, विपक्ष को भी सरकार बनाने के लिए अन्य दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।

नेतन्याहू की पार्टी सबसे बड़ी, फिर भी सरकार पर संकट

एग्जिट पोल में एक दिलचस्प पहलू यह है कि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है, लेकिन केवल सबसे बड़ी पार्टी होने से सरकार बनाने का रास्ता आसान नहीं हो जाता।

इजराइल की संसदीय व्यवस्था में सरकार बनाने के लिए गठबंधन का समर्थन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि विपक्षी दल आपस में सहमति बनाने में सफल होते हैं, तो नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने की संभावना बन सकती है।

हालांकि, गठबंधन की राजनीति और विभिन्न दलों के बीच मतभेदों के कारण अंतिम तस्वीर वास्तविक चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष पर नजर

इन एग्जिट पोल में पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को अहम बढ़त मिलती दिखाई गई है। इससे विपक्षी खेमे में सरकार बनाने की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बढ़ सकती है।

वहीं, नेतन्याहू के सामने अपने सहयोगी दलों को एकजुट रखने और बहुमत के लिए जरूरी समर्थन जुटाने की चुनौती होगी।

मतदान प्रतिशत ने भी बनाया रिकॉर्ड

केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार, इजराइल में 77.7 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह मतदान प्रतिशत 2022 के चुनाव की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक है और 1999 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है।

उच्च मतदान प्रतिशत को चुनाव में मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, केवल मतदान प्रतिशत के आधार पर किसी पार्टी की जीत या हार का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

एक अन्य सर्वे में नेतन्याहू को थोड़ी राहत

जहां तीन प्रमुख प्रसारकों के एग्जिट पोल में विपक्षी गठबंधन आगे दिखाई दे रहा है, वहीं i24NEWS के एक अलग सर्वे में नेतन्याहू के खेमे की स्थिति कुछ बेहतर बताई गई है।

इस सर्वे के अनुसार, नेतन्याहू के गठबंधन को 55 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 49 सीटें मिल सकती हैं। अरब पार्टियों को 16 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।

हालांकि, इस अनुमान में भी नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों के आंकड़े से पीछे दिखाई देता है।

अब किस पर टिकी हैं सबकी नजरें?

इजराइल के चुनावी नतीजे देश की भावी सरकार और राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल एग्जिट पोल नेतन्याहू के लिए चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश कर रहे हैं, लेकिन इन्हें अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नेतन्याहू अपने सहयोगी दलों के साथ बहुमत जुटा पाएंगे या विपक्षी गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में पहुंचेगा? इसका जवाब आधिकारिक चुनाव परिणाम आने और उसके बाद होने वाली गठबंधन वार्ताओं से ही मिलेगा।