नई दिल्ली। दिल्ली में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है। वहीं, वामपंथी नेताओं, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने संसद मार्ग थाने के बाहर पहुंचकर पुलिस से नेहा के बारे में जानकारी मांगी।
अखिलेश यादव ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर नेहा बोरा के ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हिरासत में ली गई महिला के बारे में जानकारी नहीं मिलना गंभीर मामला है।
सपा प्रमुख ने राष्ट्रीय महिला आयोग से भी इस मामले का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने नेहा बोरा को तुरंत रिहा करने की मांग करते हुए हिरासत के दौरान उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए।
संसद मार्ग थाने के बाहर पहुंचा प्रतिनिधिमंडल
नेहा बोरा की रिहाई और उनके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए वामपंथी नेता एनी राजा, AISA के सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल संसद मार्ग थाने पहुंचा।
प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने थाने के बाहर बैरिकेडिंग कर उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। सदस्य बैरिकेड हटाने और पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करने की मांग करते रहे।
प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली के डीसीपी से मिलकर नेहा के बारे में जानकारी लेना चाहता था। सदस्यों ने यह भी कहा कि यदि उनके ठिकाने की जानकारी नहीं मिलती है, तो वे गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने की मांग करेंगे।
निजी गाड़ी में हिरासत में लेने का आरोप
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने आरोप लगाया कि ‘लहरा दो तिरंगा मार्च’ में शामिल होने पहुंचीं नेहा बोरा को एक निजी गाड़ी में हिरासत में लिया गया था। उनका यह भी दावा था कि गाड़ी में कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के छह घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद नेहा से संपर्क नहीं हो पा रहा था। सदस्यों ने पुलिस से उनके ठिकाने की जानकारी देने और उन्हें रिहा करने की मांग की।
हालांकि, हिरासत की परिस्थितियों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
अभिजीत दिपके को लेकर भी चर्चा
इस घटनाक्रम के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर भी खबरें सामने आईं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सूत्रों ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस उन्हें राजधानी में ही किसी सुरक्षित स्थान पर ले गई थी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही थी।
इस मामले में भी पुलिस की आधिकारिक जानकारी और संबंधित पक्षों के दावों के बीच अंतर को स्पष्ट करना जरूरी है।
नेहा बोरा की रिहाई को लेकर बढ़ा दबाव
नेहा बोरा के मामले में अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया और प्रतिनिधिमंडल के थाने पहुंचने से उनकी हिरासत को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से उनके ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक करने और तत्काल रिहाई की मांग की।
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