चंदौली। भाजपा चंदौली में संगठनात्मक स्तर पर सब कुछ ठीक नहीं चलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। किसान मोर्चा की जिला कार्यकारिणी की सूची जारी होते ही सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई। नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देने वाले पोस्ट और संदेश अलग-अलग सोशल मीडिया आईडी से सामने आने लगे। लेकिन इस खुशी का सिलसिला ज्यादा देर तक नहीं चला। कुछ ही समय बाद जिन सोशल मीडिया आईडी से सूची और बधाई संदेश साझा किए गए थे, वहां से सूची हटाए जाने लगी। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर नई हलचल पैदा कर दी है।
दरअसल, किसान मोर्चा की जिला कार्यकारिणी में महामंत्री, जिला मंत्री और उपाध्यक्ष समेत विभिन्न पदों पर पदाधिकारियों की घोषणा जिला अध्यक्ष और किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष की ओर से की गई थी। सूची सामने आने के बाद संबंधित लोगों और समर्थकों ने सोशल मीडिया पर बधाई देना शुरू कर दिया था। हालांकि, अचानक सूची हटाए जाने की खबर सामने आने के बाद कार्यकर्ताओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
पार्टी के एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सूची हटाए जाने के पीछे किसी प्रभावशाली नेता का दबाव होने की चर्चा है। आरोप है कि संगठन में पदाधिकारियों के चयन को लेकर कुछ नेताओं की पसंद को प्राथमिकता देने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
वहीं, युवा मोर्चा की जिला कार्यकारिणी को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों की सूची अभी जारी होनी बाकी है। ऐसे में वहां भी नियुक्तियों को लेकर अलग-अलग स्तर पर खींचतान और दबाव की चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं।
सवाल यह है कि आखिर सूची जारी होने के बाद उसे हटाने की नौबत क्यों आई? क्या पदाधिकारियों के चयन को लेकर संगठन के भीतर सहमति नहीं बन पाई या फिर किसी प्रभावशाली नेता की आपत्ति के बाद फैसला बदला गया? हालिया एमएलसी चुनाव के परिणामों के बाद संगठन की कार्यशैली और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में किसान मोर्चा की सूची जारी होने और फिर सोशल मीडिया से हटाए जाने का घटनाक्रम भाजपा के जिला संगठन की अंदरूनी स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।
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