प्रयागराज। बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी के मामलों को देखते हुए साइबर क्राइम थाना कमिश्नरेट प्रयागराज पुलिस की ओर से शुक्रवार को कटरा स्थित क्लाइमैक्स कोचिंग में साइबर जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान करीब 900 छात्र-छात्राओं को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों, ऑनलाइन सुरक्षा और ठगी से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस टीम ने विद्यार्थियों से डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की।
पुलिस आयुक्त एवं अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट प्रयागराज के निर्देशन तथा पुलिस उपायुक्त नोडल साइबर और सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर) के पर्यवेक्षण में आयोजित कार्यक्रम में साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक राघवेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध की बदलती तकनीकों से अवगत कराया। कार्यक्रम में क्लाइमैक्स कोचिंग में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
पुलिसकर्मियों ने बताया कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाकर आर्थिक और व्यक्तिगत नुकसान पहुंचा रहे हैं। फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी, बैंक अधिकारी बनकर बातचीत करना, फर्जी लिंक भेजना, नकली वेबसाइट के माध्यम से जानकारी हासिल करना, ऑनलाइन निवेश और नौकरी का झांसा देना तथा सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराधों के बारे में विद्यार्थियों को उदाहरण सहित जानकारी दी गई।
अभियान के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि बैंक, बीमा कंपनी, सरकारी विभाग या कोई अन्य संस्था बनकर यदि कोई व्यक्ति फोन पर ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी, पासवर्ड या यूपीआई पिन मांगता है तो ऐसी जानकारी कतई साझा नहीं करनी चाहिए। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने अथवा संदिग्ध वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी दर्ज करने से बचना चाहिए।
सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी पुलिस टीम ने विशेष जोर दिया। विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे अपने सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग मजबूत रखें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें और अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक, शैक्षणिक अथवा वित्तीय जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा न करें। ई-मेल और सोशल मीडिया अकाउंट में टू-स्टेप वेरिफिकेशन या टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखने के लिए भी प्रेरित किया गया।
पुलिस ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन नौकरी, लॉटरी, निवेश और आकर्षक ऑफर के नाम पर आने वाले फोन कॉल और मैसेज से सावधान रहने को कहा। साइबर अपराधियों द्वारा भेजे जाने वाले संदिग्ध ऐप, एपीके फाइल या लिंक को डाउनलोड न करने की भी सलाह दी गई। सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते समय संवेदनशील बैंकिंग लेनदेन से बचने की जानकारी भी दी गई।
पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने की सलाह दी। बताया गया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराने के बजाय बिना देरी किए साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करना चाहिए। इसके अलावा National Cyber Crime Reporting Portal पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। पुलिस ने कहा कि शिकायत में जितनी जल्दी कार्रवाई होगी, ठगी की रकम को रोकने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस टीम ने विद्यार्थियों से साइबर सुरक्षा के संदेश को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाने की अपील की। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल जीवन को आसान बनाता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। इसलिए किसी भी डिजिटल लेनदेन से पहले जानकारी की पुष्टि करना और संदिग्ध गतिविधि होने पर तत्काल शिकायत करना जरूरी है।
साइबर जागरूकता कार्यक्रम में निरीक्षक अर्जुन द्विवेदी, उपनिरीक्षक विनोद कुमार यादव, उपनिरीक्षक बृजेश चौरसिया और कांस्टेबल सुधांशु राय सहित साइबर क्राइम थाना कमिश्नरेट प्रयागराज की पुलिस टीम मौजूद रही।
पुलिस ने अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया कि साइबर अपराध के प्रति जागरूकता ही उसका सबसे प्रभावी बचाव है। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या ऑनलाइन अपराध होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करने, cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने तथा नजदीकी थाने की साइबर हेल्प डेस्क से संपर्क करने की अपील की गई।
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