राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बोले सीएम—लोकतंत्र में सवाल उठाइए, लेकिन अंतिम तथ्य संस्थागत फैसलों और रिकॉर्ड से तय होने चाहिए
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर चुनाव आयोग को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बहाने निशाना साधा। रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रेस वार्ता में धामी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती देश की संवैधानिक संस्थाओं से होती है और चुनाव आयोग भी एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। उन्होंने कहा कि आयोग के आधिकारिक निर्णयों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
धामी ने 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू व डॉ. विवेक जोशी की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि बैठक के बाद जारी नोट को पूरे आयोग की मंजूरी प्राप्त है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 24 जून 2025 को जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मूल आदेश तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से जारी हुआ था। बाद में विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की समय-सारिणी को भी आयोग ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
'इंटरनल नोट को अंतिम फैसला बताना उचित नहीं'
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक रिपोर्ट में दो निर्वाचन आयुक्तों की ओर से विभिन्न मामलों में आपत्तियां दर्ज किए जाने का उल्लेख है। हालांकि, उनके अनुसार आयोग का आधिकारिक पक्ष SIR से जुड़े अंतिम आदेशों को सर्वसम्मत बताता है। धामी ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन किसी आंतरिक टिप्पणी को सीधे संस्थागत मतभेद या अंतिम निर्णय के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए। हाल की रिपोर्टों में दोनों निर्वाचन आयुक्तों की ओर से कई फैसलों पर आपत्तियों का उल्लेख भी हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
धामी ने 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में SIR को लेकर चुनाव आयोग की शक्ति और अपनाई गई प्रक्रिया को न्यायालय ने वैध माना है। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक सारांश के अनुसार, अदालत ने बिहार SIR को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत आयोग के अधिकार क्षेत्र में माना और प्रक्रिया को वैधानिक प्रावधानों व 1960 के नियमों के अनुरूप पाया।
धामी ने कहा कि चुनाव आयोग से जुड़े सवालों पर बहस तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए। कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे गए पत्र के मुद्दे पर भी उन्होंने आयोग के स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि यह SIR की नीति से नहीं, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी से जुड़े प्रशासनिक विषय से संबंधित था।
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