पाकिस्तान पर बिना नाम लिए निशाना, आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ दोहराया; AI में ग्लोबल साउथ की भागीदारी और युद्धों के बीच शांति पर भी जोर
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख एक बार फिर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने या उसके परिणामों से बचने की कोशिशों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। जयशंकर ने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली सरकारों की जवाबदेही तय करने और उसके वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत बताई।
‘आतंकवाद के खिलाफ अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल करेंगे’
जयशंकर ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल करेगा और जीरो टॉलरेंस की नीति में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के साथ दोस्ती और सद्भावना का सह-अस्तित्व संभव नहीं है। उनका यह संदेश भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे आतंकवाद संबंधी विवाद के संदर्भ में देखा गया।
AI को लेकर भारत का विजन भी रखा
विदेश मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी अपने संबोधन का अहम हिस्सा बनाया। उन्होंने भारत में आयोजित AI Impact Summit का उल्लेख करते हुए AI को मानव सशक्तिकरण, आर्थिक समृद्धि और बड़े पैमाने पर समस्याओं के समाधान का माध्यम बताया। जयशंकर ने जोर दिया कि देशों को अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप अपना AI इकोसिस्टम, मॉडल और डिप्लॉयमेंट रणनीति विकसित करने की क्षमता होनी चाहिए।
मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र
जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक संघर्षों पर भी भारत का पक्ष रखा। मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने स्थायी शांति के लिए दो-राज्य समाधान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। रूस-यूक्रेन युद्ध समेत विभिन्न संघर्षों के वैश्विक सुरक्षा और विकास पर पड़ रहे प्रभावों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
जयशंकर के संबोधन का व्यापक संदेश यह रहा कि आतंकवाद के खिलाफ जवाबदेही, AI जैसी नई तकनीकों में समान भागीदारी और मौजूदा युद्धों के बीच शांति की कोशिशों के साथ वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत है। भारत ने बहुध्रुवीय होती दुनिया के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव की मांग भी दोहराई।
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