AIMIM प्रमुख ने कहा- नेहरू से मोदी तक मुस्लिमों को बराबरी का राजनीतिक हिस्सेदार नहीं बनाया; संसद में प्रतिनिधित्व पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को BJP और कांग्रेस समेत देश की राजनीतिक पार्टियों पर मुसलमानों को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं देने का आरोप लगाया। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ में बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि लगातार बनी सरकारों ने मुस्लिम समुदाय को बराबरी का राजनीतिक हिस्सेदार बनाने के बजाय वोट बैंक और ‘शो-ब्वॉय’ तक सीमित कर दिया।
ओवैसी ने कहा कि देश के संविधान निर्माताओं ने ऐसी व्यवस्था की कल्पना की थी, जिसमें राज्य का कोई धर्म नहीं होगा और सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे। उनके मुताबिक, इसके बावजूद विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में मुसलमान राजनीतिक रूप से हाशिये पर रहे। उन्होंने कहा कि इस समस्या के लिए किसी एक सरकार या पार्टी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
‘नेहरू से मोदी तक सिर्फ वोटर बनाया’
ओवैसी ने कहा, “नेहरू से लेकर मोदी तक, मुसलमानों को सिर्फ वोटर बनाया गया, बराबरी का हिस्सेदार नहीं।” उन्होंने दावा किया कि जो दल खुद को सेक्युलर कहते हैं, उनमें भी अल्पसंख्यकों को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की पर्याप्त ‘बौद्धिक ईमानदारी’ नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी पार्टी मुसलमानों की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और राजनीतिक एजेंसी को मजबूत होते नहीं देखना चाहती।
संसद में प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया
ओवैसी ने संसद में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का आंकड़ा सामने रखते हुए कहा कि यह करीब चार प्रतिशत है, जबकि उन्होंने मुस्लिम आबादी करीब 18 करोड़ बताई। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी आबादी का संसद में प्रतिनिधित्व इतना कम क्यों है। ओवैसी ने इसे केवल संख्या का सवाल नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक आवाज और स्वतंत्र राजनीतिक एजेंसी से जुड़ा मुद्दा बताया।
उन्होंने BJP पर मुस्लिम उम्मीदवारों को पर्याप्त टिकट नहीं देने का आरोप लगाया और दूसरी ओर कथित तौर पर खुद को सेक्युलर बताने वाले दलों पर मुस्लिमों को केवल मतदाता के तौर पर देखने का आरोप लगाया। ओवैसी ने कहा कि राजनीतिक न्याय के बिना सामाजिक और आर्थिक न्याय हासिल करना मुश्किल है।
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