संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और नशे से दूरी ही बचाव की मजबूत ढाल

वाराणसी। बदलती जीवनशैली ने जिंदगी को सुविधाजनक जरूर बनाया है, लेकिन इसके साथ कई ऐसी बीमारियां भी तेजी से बढ़ी हैं, जिनकी आहट शुरुआत में सुनाई तक नहीं देती। अनियमित खानपान, फास्ट फूड और तैलीय भोजन की बढ़ती आदत, शारीरिक गतिविधियों में कमी, मोटापा, तनाव और शराब का सेवन लिवर की सेहत पर भारी पड़ रहा है। इन्हीं परिस्थितियों के बीच फैटी लिवर आधुनिक जीवनशैली की एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है। चिंता की बात यह है कि शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते और जब तक व्यक्ति को बीमारी का एहसास होता है, तब तक लिवर को नुकसान पहुंचने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी हो सकती है।

इसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या को लेकर परफेक्ट मिशन ने वाराणसी के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, लिवर एवं पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. इंद्रेश दीक्षित से विशेष बातचीत की। डॉ. दीक्षित का स्पष्ट कहना है कि लिवर शरीर का ‘पावरहाउस’ है और इसकी अनदेखी पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। खानपान और दिनचर्या में अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाकर फैटी लिवर सहित कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। प्रस्तुत हैं विशेष बातचीत के प्रमुख अंश—


बिना दस्तक बढ़ती बीमारी, आखिर क्या है फैटी लिवर का खतरा?

फैटी लिवर ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर की कोशिकाओं में आवश्यकता से अधिक वसा जमा होने लगती है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में व्यक्ति को अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता। कई लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान ही इसका पता चलता है, इसलिए इसे ‘साइलेंट’ बीमारी भी माना जाता है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं तथा बीमारी आगे बढ़कर लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर अवस्था तक पहुंच सकती है। इसलिए फैटी लिवर को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है।


थाली से दिनचर्या तक बिगड़ा संतुलन, क्यों बढ़ रहे फैटी लिवर के मामले?

आधुनिक जीवनशैली फैटी लिवर के बढ़ते मामलों की बड़ी वजहों में शामिल है। घर के संतुलित और पौष्टिक भोजन की जगह फास्ट फूड, अत्यधिक तैलीय और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ा है। इसके साथ देर रात तक जागना, भोजन का निश्चित समय न होना, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बढ़ता वजन लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। जब खानपान और दिनचर्या का यह असंतुलन लंबे समय तक बना रहता है तो लिवर में वसा जमा होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए केवल बीमारी होने पर उपचार कराने के बजाय जीवनशैली को पहले से अनुशासित रखना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।


शराब की हर अतिरिक्त मात्रा लिवर पर डाल सकती है भारी बोझ

अत्यधिक शराब का सेवन लिवर की कोशिकाओं को सीधे नुकसान पहुंचा सकता है। लगातार शराब पीने से लिवर की सामान्य कार्यक्षमता प्रभावित होती है और उसमें वसा का जमाव बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने पर लिवर को गंभीर और स्थायी क्षति पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए स्वस्थ लिवर के लिए नशे से दूरी बेहद महत्वपूर्ण है। शराब के सेवन से बचना और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना लिवर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की दिशा में प्रभावी कदम है।


शरीर का ‘पावरहाउस’ है लिवर, बिगड़ा तो प्रभावित होगी पूरी व्यवस्था

लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन से प्राप्त पोषक तत्वों के चयापचय, ऊर्जा के प्रबंधन और शरीर से हानिकारक तत्वों को निकालने सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। ऐसे में लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने का असर शरीर की दूसरी प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि लिवर को शरीर का ‘पावरहाउस’ कहा जाता है। जिस तरह हम जीवन की दूसरी जरूरी चीजों की नियमित देखभाल करते हैं, उसी तरह लिवर की सेहत को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।


दवा से पहले दिनचर्या की ढाल, इन आदतों से मजबूत रहेगा लिवर

फैटी लिवर से बचाव की मजबूत नींव संतुलित जीवनशैली है। पौष्टिक और संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन पर नियंत्रण और पर्याप्त पानी का सेवन दैनिक जीवन का हिस्सा होना चाहिए। अत्यधिक तैलीय भोजन, जंक फूड और अस्वास्थ्यकर खानपान से दूरी बनाना जरूरी है। भोजन और नींद का निश्चित समय रखने के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण है। समय पर जांच होने से समस्या का शुरुआती अवस्था में पता चल सकता है और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उसे नियंत्रित करने में मदद मिलती है।


स्वस्थ लिवर को बनाइए जीवन का संकल्प, बीमारी का मत कीजिए इंतजार

आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि फैटी लिवर को मामूली समस्या मानकर नजरअंदाज न करें। यह बिना बड़े लक्षणों के धीरे-धीरे आगे बढ़ सकता है। स्वस्थ रहने के लिए बीमारी सामने आने का इंतजार करने के बजाय आज से ही खानपान, व्यायाम, नींद और दिनचर्या में अनुशासन लाना चाहिए। नशे से दूरी और पौष्टिक भोजन को आदत के बजाय स्वस्थ जीवन के संकल्प की तरह अपनाना चाहिए। जीवनशैली में समय रहते किया गया सुधार न केवल लिवर को सुरक्षित रखने में मदद करता है, बल्कि मोटापा और उससे जुड़ी कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को भी कम कर सकता है।


सेहत की असली पूंजी—आज की सावधानी, कल का स्वस्थ लिवर

फैटी लिवर की चुनौती का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि इसका मुकाबला केवल अस्पताल पहुंचने के बाद नहीं, बल्कि घर की रसोई, भोजन की थाली और रोजमर्रा की दिनचर्या से शुरू होता है। डॉ. इंद्रेश दीक्षित की बातों का सार भी यही है—लिवर की बीमारी को गंभीर होने का मौका देने से बेहतर है कि जीवनशैली को समय रहते सुधार लिया जाए। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, नियंत्रित वजन, पर्याप्त नींद और नशे से दूरी को जीवन का हिस्सा बनाकर स्वस्थ लिवर और बेहतर जीवन की मजबूत नींव रखी जा सकती है।