वाराणसी। 29 जुलाई। भारतीय संस्कृति की महान गुरु शिष्य परम्परा जो धर्म और जाति से रहित है। न चेला अपने गुरु की जाति और धर्म पूछता है, न गुरु अपनी शरण में आये चेला का धर्म पूछता है। बस भारत की परम्परा में यही एक ऐसा सम्बन्ध है जो हर मुसीबत में साथ भी देता है और सही मार्ग पर चलने का नैतिक बल भी प्रदान करता है।
इसी परम्परा को निभाने की सबसे खूबसूरत तस्वीर पातालपुरी मठ से आई, जहां मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज से दीक्षा लेने आदिवासी समाज और मुस्लिम परिवार के लोग भी पहुंचे थे। मुस्लिम समाज के लोगों ने जाकिर पाण्डेय एवं अफरोज पाण्डेय के नेतृत्व में मुस्लिम परिवार के सदस्यों ने जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज की विधिवत आरती उतारी। अपने गुरु के चरण स्पर्श किये। कुछ नए सदस्यों ने गुरुदीक्षा ली। जगद्गुरु ने बिना किसी भेदभाव के सबको आशीर्वाद दिया।
इस अवसर पर रामपंथ के पंथाचार्य डॉ० राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि यह सांस्कृतिक इतिहास का क्रांतिकारी परिवर्तन है। तमाम भेदभाव के बीच कम से कम गुरु शिष्य परम्परा तो इससे अछूता है। मुसलमानों के सामाजिक जीवन को बदलने और व्यवहार परिवर्तन के लिए जीवन मे गुरु की जरूरत है। अपने संस्कृति और अपनी परम्पराओं के प्रति मुस्लिम समाज भी जागरूक हो रहा है, इसलिए तेजी से हिन्दू मुसलमान एक दूसरे के करीब आ रहे है। एकता और प्रेम के लिए रामानन्दी सम्प्रदाय के संतों की बड़ी भूमिका है।
जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि गुरु शिष्य परम्परा में किसी तरह का भेद नहीं किया जा सकता। मेरे हजारों शिष्य मुसलमान हैं और वे कई पीढ़ियों से हैं। उनके पूर्वज भी रामानन्दी सम्प्रदाय के शिष्य थे। इसलिए परम्परा का निर्वहन करते हुए मुसलमान बनने के बाद भी वे हमारे शिष्य बन रहे। छुआछूत और भेदभाव को मिटाकर एक करना ही गुरु का काम है। भारतीय संस्कृति किसी तरह के भेद को स्वीकार नहीं करती। रामपंथ सभी लोगों को स्वीकार्यता प्रदान करता है। रामपंथ में सबका स्वागत है। धर्म, जाति, भाषा, देश का भेद हम किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि हम जानते हैं कि भारतभूमि पर रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति पूर्वजों से एक है।
दलित विचारक ज्ञान प्रकाश जी, आदिवासियों के धर्मगुरु द्वारिका प्रसाद, मुस्लिमों के सामाजिक नेता नौशाद अहमद दूबे ने जगद्गुरु बालक देवाचार्य का रामनामी दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया।
इस अवसर पर प्रभु रामदास जी, जगदीश्वर दास जी, डॉ अर्चना भारतवंशी , डॉ नजमा परवीन , नाज़नीन अंसारी , डॉ मृदुला जायसवाल , कलीम , लियाकत , गुलाब अली , आफताब आलम ,सलीम अंसारी ,अब्दुल्ला दूबे के साथ सैकड़ो की संख्या में मुस्लिमो की उपस्थिति थी ।
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