वाराणसी। सोशल मीडिया आज के दौर में दोधारी तलवार की तरह है। इसका विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए तो यह शिक्षा, संवाद और जनजागरूकता का प्रभावी माध्यम बन सकता है, जबकि अविवेकपूर्ण प्रयोग समाज के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। यह विचार प्रोफेसर बी.एन. जुयाल एजुकेशनल फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित सोशल मीडिया विषयक राष्ट्रीय वेबिनार संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों से जुड़े विद्वानों और विशेषज्ञों ने व्यक्त किए।

संगोष्ठी का शुभारंभ ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. अंबिका प्रसाद गौड़ के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उसके जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. अत्रि भारद्वाज ने विषय प्रवर्तन करते हुए सोशल मीडिया की वर्तमान भूमिका और उससे जुड़े सामाजिक प्रभावों की चर्चा की।

मुख्य वक्ता मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के डॉ. कुंजन आचार्य ने कहा कि सोशल मीडिया दूर बैठे लोगों को जोड़ने का सशक्त माध्यम है, लेकिन इसके अविवेकपूर्ण उपयोग से अपने रिश्ते भी दूर हो सकते हैं।

जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा की डॉ. ऋचा मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से शिक्षा और ज्ञान का प्रसार सरल हुआ है, किन्तु गलत और भ्रामक सूचनाओं के तेजी से फैलने का खतरा भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति असत्य जानकारी प्रसारित कर लोगों को भ्रमित कर सकता है।

आबू राज, राजस्थान से जुड़े डॉ. सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि देश की लगभग 60 प्रतिशत आबादी सोशल मीडिया का उपयोग कर रही है, जिनमें बड़ी संख्या अपरिपक्व उपयोगकर्ताओं की है। उन्होंने गोपनीयता और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं पर विशेष बल दिया।

रायपुर की वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संजू साहू पूनम ने कहा कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, इसलिए इसका उपयोग सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने गलत सूचनाओं के प्रसार पर रोक लगाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से जुड़े शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा पत्रकारों ने भाग लिया और सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग के साथ डिजिटल नैतिकता और जागरूकता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।