वाराणसी। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी काशी में स्थित श्रीकाशी विश्वनाथ धाम बुधवार को केवल शिवभक्ति का केंद्र ही नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ भारत के संकल्प का भी सशक्त मंच बन गया। बाबा विश्वनाथ के चरणों में मत्था टेकने पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं को जब प्रसाद और पूजन सामग्री के लिए कपड़े से बने झोले भेंट किए गए, तो यह केवल एक उपहार नहीं था, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश भी था। धाम परिसर में "स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत" और "पॉलिथीन छोड़ो, पर्यावरण जोड़ो" का भाव श्रद्धालुओं के बीच सहज रूप से प्रसारित होता दिखाई दिया।

गंगा और काशी का रिश्ता केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में प्रकृति और जीवन के संतुलन का प्रतीक भी है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए नमामि गंगे के स्वयंसेवी सदस्यों ने श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से सिंगल यूज पॉलिथीन का उपयोग न करने की अपील की। प्रसाद एवं अन्य सामग्री पॉलिथीन में लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को कपड़े के झोले वितरित किए गए, ताकि वे पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित हों।

धाम परिसर में स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं के साथ संवाद स्थापित करते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का जनजागरण अभियान भी चलाया। इस दौरान अनेक श्रद्धालुओं ने कपड़े के झोले को सहर्ष स्वीकार किया और इसे पर्यावरण बचाने की दिशा में सार्थक पहल बताया। लोगों ने माना कि यदि धार्मिक स्थलों से ऐसे संदेश समाज तक पहुंचते हैं तो उनका प्रभाव कहीं अधिक व्यापक होता है।

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि बाबा विश्वनाथ का धाम केवल आध्यात्मिक चेतना का केंद्र नहीं, बल्कि प्रकृति और स्वच्छता के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का भी प्रेरणास्थल है। उन्होंने कहा कि गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता तभी संभव होगी, जब प्रत्येक नागरिक सिंगल यूज पॉलिथीन का त्याग कर पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाए। उनका कहना था कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव ही भविष्य की बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी समाधान बन सकता है।

उन्होंने कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में आयोजित यह अभियान केवल झोले वितरण तक सीमित नहीं था, बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनचेतना का व्यापक प्रयास था। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए प्रकृति संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।

कार्यक्रम में नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला, चंद्रजीत विजय, अभिजीत, बडेलाल, नंदिनी सहित नमामि गंगे के स्वयंसेवकों और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चलते हैं, तब स्वच्छ समाज और स्वस्थ भविष्य का मार्ग और अधिक सशक्त हो जाता है।