वाराणसी। फेफड़ों का कैंसर ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसकी शुरुआती आहट कई बार सामान्य खांसी, सांस फूलने या सीने में दर्द के पीछे छिपी रह जाती है। यही अनदेखी आगे चलकर बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस के उपलक्ष्य में अगस्त माह में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के क्रम में वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ एवं पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विकास जायसवाल ने फेफड़ों के कैंसर के कारणों, शुरुआती संकेतों और बचाव को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। विभिन्न संस्थाओं द्वारा चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित डॉ. जायसवाल लंग प्लस क्लिनिक, महमूरगंज एवं RIMS हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, चांदपुर से जुड़े हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि फेफड़ों के कैंसर से लड़ाई में डर से ज्यादा जरूरी जागरूकता है, क्योंकि शरीर के संकेतों को समय रहते समझकर जांच और उपचार की दिशा में कदम बढ़ाया जाए तो बीमारी पर नियंत्रण की संभावना बेहतर हो सकती है।

कैंसर से होने वाली मौतों में फेफड़ों का कैंसर बड़ी चुनौती

डॉ. विकास जायसवाल के अनुसार विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस प्रत्येक वर्ष 1 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को फेफड़ों के कैंसर के कारणों, लक्षणों, रोकथाम और समय पर पहचान के महत्व के प्रति जागरूक करना है। फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है और भारत में भी कैंसर के मरीजों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। इसलिए बीमारी होने के बाद उपचार जितना महत्वपूर्ण है, उससे पहले जोखिमों को समझना और बचाव के उपाय अपनाना भी उतना ही आवश्यक है।

युवाओं में दिखावे के लिए बढ़ता धूम्रपान बेहद खतरनाक

डॉ. जायसवाल ने युवाओं में धूम्रपान की बढ़ती प्रवृत्ति पर विशेष चिंता जताई। उनका कहना है कि आज कई युवा स्टाइल, दिखावे या साथियों के प्रभाव में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन शुरू कर देते हैं, जबकि इसका सीधा असर फेफड़ों की सेहत पर पड़ता है। सिगरेट और तंबाकू में मौजूद हानिकारक तत्व फेफड़ों की कोशिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए धूम्रपान को सामान्य आदत या फैशन समझना भविष्य की सेहत के साथ बड़ा जोखिम साबित हो सकता है।

सामान्य खांसी समझकर न टालें शरीर की चेतावनी

फेफड़ों के कैंसर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक इसकी शुरुआती पहचान है। डॉ. जायसवाल बताते हैं कि प्रारंभिक अवस्था में इसके संकेत कई बार सामान्य श्वसन संबंधी समस्याओं जैसे दिखाई दे सकते हैं। यदि दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी बनी रहे, सीने में लगातार दर्द हो, सांस लेने में परेशानी या सांस फूलने लगे अथवा खांसते समय बलगम में खून दिखाई दे तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण है।

अचानक वजन घटना और लगातार थकान भी हो सकती है चेतावनी

डॉ. जायसवाल के मुताबिक फेफड़ों से जुड़े प्रत्यक्ष लक्षणों के अलावा शरीर में होने वाले कुछ अन्य बदलावों पर भी ध्यान देना जरूरी है। बिना स्पष्ट कारण अचानक वजन कम होना या लगातार अत्यधिक थकान महसूस होना भी ऐसी स्थिति है, जिसमें चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। किसी एक लक्षण का होना अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं करता, लेकिन लंबे समय तक बने रहने वाले या असामान्य लक्षणों की अनदेखी भी नहीं की जानी चाहिए।

सिर्फ सिगरेट ही नहीं, प्रदूषित हवा भी फेफड़ों के लिए खतरा

फेफड़ों की सुरक्षा की चर्चा केवल धूम्रपान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। डॉ. विकास जायसवाल के अनुसार रसोई का धुआं, वायु प्रदूषण और हानिकारक रसायनों के संपर्क से भी फेफड़ों की सेहत प्रभावित हो सकती है। ऐसे में स्वच्छ हवा, बेहतर वेंटिलेशन और धुएं व हानिकारक रसायनों के अनावश्यक संपर्क से बचाव को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। विशेष रूप से लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने या काम करने वाले लोगों को अपने श्वसन स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग रहने की आवश्यकता है।

दो सप्ताह से ज्यादा खांसी तो चिकित्सकीय सलाह में न करें देरी

डॉ. जायसवाल ने पांच प्रमुख संकेतों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है—दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, सांस लेने में कठिनाई या सांस फूलना, सीने में लगातार दर्द, बलगम में खून आना तथा बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना या अत्यधिक थकान। इनमें से कोई लक्षण लगातार बना रहे तो स्वयं अनुमान लगाने या उसे मामूली समस्या मानकर टालने के बजाय डॉक्टर से संपर्क कर उचित जांच करानी चाहिए।

जागरूकता ही बचाव की पहली मजबूत दीवार

डॉ. विकास जायसवाल का संदेश साफ है—फेफड़ों के कैंसर के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार जागरूकता, जोखिम कारकों से बचाव और संदिग्ध लक्षणों की समय पर चिकित्सकीय जांच है। धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, प्रदूषण व हानिकारक धुएं से यथासंभव बचाव और शरीर में लंबे समय तक बने रहने वाले बदलावों के प्रति सतर्कता गंभीर बीमारी की समय पर पहचान में मदद कर सकती है। फेफड़े शरीर को हर पल सांस देते हैं, इसलिए उनकी चेतावनी को अनसुना न करें—समय पर उठाया गया एक कदम जिंदगी के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।