थार गाड़ी से धक्का, गाली-गलौज, परिवार पर मारपीट और पिस्टल से गोली मारने की दिया धमकी, ग्रामवासियों के उग्र होने पर भागते समय सड़क पर गिरकर घायल हुए आरोपी, पुलिसिया रवैये पर उठ रहे है सवाल

वाराणसी। वर्दी धारण करने के बाद कुछ पुलिसकर्मियों में इतनी हनक आ जाती है कि किसी भी प्रकार का अपराध होने पर कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता क्योंकि वर्दी वाला वर्दी वाले को बचाने का प्रयास करता दिखता है। ऐसा ही एक गंभीर मामला शिवपुर थाना चांदमारी चौकी अंतर्गत ग्राम परमानंदपुर (लोढान) में सामने आया है। लिखित तहरीर के अनुसार पीड़ित रोहित वर्मा, पुत्र अशोक वर्मा, निवासी ग्राम परमानंदपुर (लोढान) ने बताया कि रविवार शाम करीब सात बजे वे अपने घर के सामने सड़क किनारे टीवीएस एक्सल बाइक पर खड़े था। उसी समय गांव में बाहर से आकर निवास बनाकर रहने वाले पुलिस विभाग के कर्मचारी अंकुर यादव और उनकी साली नैन्सी यादव के साथ थार फोर-व्हीलर गाड़ी से आया। आरोप है कि जीजा की वर्दी की हनक दिखाते हुए उन्होंने गाड़ी से पीड़ित को धक्का मार दिया, जिससे वे खड़ी बाइक के साथ गिर गया और घायल हो गया। विरोध करने और सही तरीके से गाड़ी चलाने की बात कहने पर गाड़ी से महिला की आपत्तिजनक आवाज आई और गाली-गलौज शुरू हो गई। यह महिला पुलिसकर्मी की साली बताई जा रही हैं।

शोर सुनकर गांव के लोग एकत्र हो गए और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत करा दिया गया। लेकिन आधे घंटे बाद अंकुर यादव और नैन्सी यादव 10-12 लोगों के साथ वापस लौटे और पीड़ित तथा उनके परिवार पर हमला बोल दिया। शोर मचाने पर गांव वाले फिर एकजुट हो गए। आरोप है कि अंकुर यादव बार-बार कमर पर हाथ रखकर पिस्टल से गोली मारने की धमकी देने लगा। घटना को तूल देने में साली नैन्सी यादव की भूमिका प्रमुख बताई जा रही है। आरोप है कि उसने उकसाते हुए कहा कि जीजा पुलिस में हो, इन लोगों को छोड़ना नहीं है, ये कुछ बिगाड़ नहीं सकते। इसके बाद अंकुर यादव ने हाथ पीछे करके गोली मारने की धमकी फिर देनें लगा। अंकुर यादव और नैन्सी यादव पीड़ित की मां को बुरी तरह मारने-पीटने लगे और आरोप है कि अंकुर यादव ने पीड़ित की माँ का साड़ी पकड़कर खींच दिया, बेइज्जत करने की कोशिश की गई। इस मंजर को देखकर गांव की महिलाएं और पुरुष उग्र हो गए क्योंकि महिला के सम्मान की बात थी। ग्रामवासियों की उग्रता देखते ही अंकुर यादव, उनकी साली और साथ आए लोग भागने लगे। भागने के दौरान अंकुर यादव सड़क पर मुंह के बल गिर पड़े, जिससे उनके चेहरे पर चोट लग गई और खून निकल आया।

गांव वालों का कहना है कि जब से ये लोग यहां जमीन लेकर मकान बनाकर रहने लगे हैं, तब से आतंक मचा रखा है। गाड़ी लेकर निकलते समय गांव वालों को कीड़ा-मकोड़ा समझते हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि अंकुर यादव पुलिस विभाग में कार्यरत होकर भी गलत भाषा का प्रयोग करते हैं और शराब पीकर थार गाड़ी से किसी न किसी को ठोकर मारते रहते हैं। जब पहले विवाद को गांव वालों ने शांत कर दिया था, तो दोबारा 10-12 लोगों को लेकर आने की क्या जरूरत थी, यह घटना वर्दी की हनक में चूर होने का साफ दर्शाती है। पीड़ित ने लिखित तहरीर देकर शिवपुर थाने में मुकदमा पंजीकृत कराने की मांग की है। उधर आरोप है कि थाने के कुछ सिपाही और उपनिरीक्षक इस मामले को उल्टा पुलिसकर्मी की तरफ से लेकर गांव वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के चक्कर में लग गए हैं। स्थानी लोगों का कहना है कि शासन प्रशासन कब जाएगी और सवाल यह है कि बनारस के शिवपुर थाने पुलिस का रवैया कब बदलेगा उच्च अधिकारी इस बदहाली पर कब जागेंगे और ऐसे पुलिसकर्मियों पर कब लगाम लगाएंगे, जो वर्दी पहनने के बाद खुद को सर्वशक्तिमान समझने लगते हैं और आम जनता को अपने पैर की नोक पर रखना चाहते हैं।