वायरल फीवर से लेकर डेंगू, मलेरिया और त्वचा रोग तक... मानसून में क्या करें, क्या न करें?


वाराणसी। बारिश की फुहारें जितनी सुकून देती हैं, उतनी ही खामोशी से अनेक बीमारियों को भी अपने साथ लेकर आती हैं। मौसम बदलते ही अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, खांसी, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, त्वचा रोग और पेट संबंधी संक्रमण के मरीज तेजी से बढ़ने लगते हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। आखिर इस मौसम में कौन-सी आदतें हमें स्वस्थ रख सकती हैं? क्या खाना चाहिए, क्या नहीं? कब घरेलू इलाज छोड़कर डॉक्टर के पास जाना चाहिए? इन्हीं तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए परफेक्ट मिशन ने लहरतारा चौराहा स्थित सिंह मेडिकल एंड हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं वरिष्ठ जनरल फिजिशियन डॉ. ए.के. सिंह से विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश—

जब मौसम बदलता है, तब सबसे पहले बदलनी पड़ती हैं खान-पान की आदतें

डॉ. ए.के. सिंह कहते हैं कि बरसात में सबसे अधिक असर हमारे खान-पान पर पड़ता है। यही कारण है कि वायरल फीवर, सर्दी, जुकाम और खांसी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। इस मौसम में ठंडी और गर्म चीजों का एक साथ सेवन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। इसलिए कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम और अत्यधिक ठंडे खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए। शरीर को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ मिलते रहें, इसके लिए पानी, सूप और अन्य पौष्टिक पेय लेना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाहर का भोजन छोड़कर केवल घर का ताजा और स्वच्छ भोजन ही अपनाएं। यही छोटी-सी सावधानी कई बड़ी बीमारियों से बचा सकती है।

डेंगू और मलेरिया का मच्छर घर के बाहर नहीं, अक्सर हमारे आसपास ही पैदा होता है

उनका कहना है कि डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां अचानक नहीं होतीं, बल्कि हमारी छोटी-छोटी लापरवाहियों का परिणाम होती हैं। घर, छत, गमलों, कूलर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी समय-समय पर बदलें और पूरे घर के आसपास नियमित साफ-सफाई रखें। यदि बुखार लगातार दो या तीन दिन तक बना रहे या दवा खाने के बाद कुछ समय के लिए उतरकर फिर लौट आए, तो इसे सामान्य वायरल मानकर अनदेखा न करें। ऐसे में तुरंत चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज ही गंभीर स्थिति से बचा सकता है।

इम्यूनिटी किसी दवा से नहीं, मजबूत होती है आपकी थाली से 

डॉ. सिंह का मानना है कि मानसून में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वाभाविक रूप से प्रभावित होती है। इसलिए इस समय बाजार के सप्लीमेंट से ज्यादा भरोसा संतुलित भोजन पर करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, ताजी सब्जियां और घर का पौष्टिक भोजन शरीर को आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं। यही पोषण शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है। यदि भोजन संतुलित रहेगा तो अधिकांश मौसमी बीमारियां शरीर के करीब भी नहीं आएंगी।

स्वाद के पीछे भागना कई बार पहुंचा देता है अस्पताल तक

बरसात में सड़क किनारे मिलने वाला चाट, गोलगप्पा, फास्ट फूड और खुला भोजन देखने में जितना आकर्षक लगता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। डॉ. ए.के. सिंह बताते हैं कि इस मौसम में उड़ने वाले कीट और मक्खियां खुले भोजन पर बैठकर संक्रमण फैलाती हैं। यही भोजन वायरल संक्रमण, फूड प्वाइजनिंग और पेट संबंधी बीमारियों की बड़ी वजह बन जाता है। यदि संभव हो तो पूरे मौसम बाहर का भोजन बंद रखें। कभी-कभार खाने की इच्छा हो तो भी सीमित मात्रा में और पूरी सावधानी के साथ ही बाहर का भोजन करें।

भीगे कपड़े और अधिक मिठास भी बन सकती है त्वचा की दुश्मन

बरसात में त्वचा संबंधी रोगों के बढ़ने की एक बड़ी वजह गीले कपड़ों में लंबे समय तक रहना है। डॉ. सिंह बताते हैं कि भीगने के बाद कपड़े न बदलने और पसीना सूख जाने से त्वचा पर बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय हो जाते हैं, जिससे फोड़े-फुंसी, खुजली और अन्य त्वचा रोग पैदा होने लगते हैं। इसलिए बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनना चाहिए। साथ ही अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन भी सीमित रखना चाहिए, क्योंकि यह भी कई लोगों में त्वचा संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है।

स्वच्छता ही वायरल संक्रमण के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है

डॉ. सिंह का कहना है कि बीमारी से बचने का सबसे सस्ता और सबसे प्रभावी उपाय साफ-सफाई है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, नियमित सफाई करें और मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी या अन्य सुरक्षित साधनों का उपयोग करें। यदि परिवार स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना ले, तो वायरल संक्रमण, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

'बरसात का आनंद लीजिए, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता मत कीजिए'

बातचीत के अंत में डॉ. ए.के. सिंह ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि मानसून का मौसम प्रकृति का उत्सव है, लेकिन इसे लापरवाही का मौसम नहीं बनने देना चाहिए। बाहर निकलते समय हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें। यदि बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचते ही तुरंत कपड़े बदलें और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें। सुबह-शाम स्नान करने की आदत अपनाएं, नियमित योग और व्यायाम करें, हरी सब्जियां तथा मौसमी फल अपने भोजन में शामिल करें और फास्ट फूड से दूरी बनाए रखें। उनका स्पष्ट संदेश है कि "बीमारी आने के बाद इलाज कराने से कहीं बेहतर है कि समय रहते सही जीवनशैली अपनाकर बीमारी को अपने घर तक पहुंचने ही न दिया जाए।"