प्रधान से प्रशासक तक: बदली व्यवस्था, बदले अधिकार; क्या थम जाएगी गांवों के विकास की रफ्तार?
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त कर प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने का निर्णय लिया है। लेकिन इस बदलाव के साथ ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली, अधिकारों और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कई नए सवाल भी खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या प्रशासक बनने के बाद ग्राम पंचायतें पहले जैसी गति से विकास कार्य करा पाएंगी, या फिर हर योजना जिला स्तर की स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझकर धीमी पड़ जाएगी?
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायतों के प्रशासकों से विस्तार से बातचीत की। बातचीत में अधिकांश प्रशासकों ने स्वीकार किया कि नई व्यवस्था में निर्णय लेने की स्वतंत्रता पहले जैसी नहीं रही। अब विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव तैयार करने से लेकर प्राक्कलन, बजट और जिलाधिकारी की स्वीकृति तक की प्रक्रिया अनिवार्य हो गई है। उनका मानना है कि इससे पारदर्शिता तो बढ़ेगी, लेकिन समयबद्ध विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि कुछ प्रशासकों का यह भी कहना है कि यदि समय पर बजट उपलब्ध हो और प्रशासनिक स्वीकृतियां शीघ्र मिलें तो विकास कार्यों की गति बरकरार रखी जा सकती है। वहीं कई प्रशासकों ने गांवों में पहले से कराए गए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए भरोसा जताया कि शेष योजनाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा।
पेश है ग्राम पंचायतों के प्रशासकों की जुबानी—नई व्यवस्था के अनुभव, चुनौतियां, उम्मीदें और गांव के विकास को लेकर उनकी स्पष्ट राय...
प्रक्रिया बढ़ी, अधिकार घटे; विकास की रफ्तार पर आएगा असर : अजय
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन अंतर्गत ग्राम पंचायत धौलपुर के प्रशासक अजय से बातचीत की। अजय का कहना है कि प्रशासक बनने के बाद निर्णय लेने की स्वतंत्रता पहले जैसी नहीं रही। अब ग्राम पंचायत में किसी भी विकास कार्य को शुरू करने से पहले उसका प्रस्ताव तैयार करना पड़ता है, प्राक्कलन (स्टीमेट) बनाकर जिलाधिकारी को स्वीकृति के लिए भेजना अनिवार्य है और बजट स्वीकृत होने के बाद ही कार्य शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले ग्राम पंचायत की जरूरतों और ग्रामीणों की अपेक्षाओं को देखते हुए तत्काल निर्णय लेकर विकास कार्य करा दिए जाते थे, लेकिन अब प्रत्येक कार्य निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया से होकर गुजरता है। उनके अनुसार, इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता तो बढ़ेगी, लेकिन निर्णय लेने में लगने वाला अतिरिक्त समय विकास योजनाओं की गति को प्रभावित करेगा। विशेषकर चुनावी वर्ष में जब हर कार्य विभिन्न स्तरों की स्वीकृति पर निर्भर होगा, तब योजनाओं के धरातल पर उतरने में विलंब होना स्वाभाविक है। ऐसे में उनका मानना है कि यदि स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई तो गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार पहले की तुलना में निश्चित रूप से धीमी पड़ सकती है।
जनप्रतिनिधि से प्रशासक बनने पर बदली भूमिका, प्रक्रिया बनी बड़ी चुनौती : बलिराम पटेल
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन अंतर्गत ग्राम पंचायत भोजपुर के प्रशासक बलिराम पटेल से बातचीत की। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा परिवर्तन उनकी भूमिका में आया है। पहले ग्राम प्रधान एक जनप्रतिनिधि के रूप में गांव की आवश्यकताओं के अनुरूप निर्णय लेने और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का अधिकार रखता था, जबकि प्रशासक के रूप में अब वही स्वतंत्रता नहीं है। किसी भी विकास कार्य को शुरू करने से पहले जिलाधिकारी की स्वीकृति आवश्यक हो गई है, जिससे कार्यों की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक औपचारिक और समय लेने वाली हो गई है। उनका मानना है कि गांव का जनप्रतिनिधि स्थानीय जरूरतों को बेहतर ढंग से समझते हुए तत्काल निर्णय ले सकता था, लेकिन प्रशासक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया से बंधा होता है। हालांकि उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि चुनावी वर्ष होने के बावजूद विकास कार्य पूरी तरह नहीं रुकेंगे। यदि समय पर बजट उपलब्ध होता रहा और स्वीकृतियां मिलती रहीं तो योजनाएं पहले की तरह आगे बढ़ेंगी तथा गांवों में विकास की रफ्तार भी बनी रहेगी।
अधिकार सीमित हुए, हर भुगतान के लिए जिला निर्भरता बढ़ी : शिव शंकर सिंह
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़ीपुर के प्रशासक शिव शंकर सिंह से बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रशासक बनने के बाद सबसे बड़ा परिवर्तन वित्तीय अधिकारों में आया है। पहले ग्राम प्रधान के रूप में पांच लाख रुपये तक के कार्यों के संबंध में निर्णय लेने की सुविधा थी, लेकिन अब वह अधिकार समाप्त हो गया है। वर्तमान व्यवस्था में छोटे से छोटे भुगतान और बड़े विकास कार्यों के लिए भी फाइल जिला स्तर पर भेजनी पड़ती है, जहां से स्वीकृति आने में कई दिन लग जाते हैं। उनका कहना है कि इसी कारण विकास कार्य पूरी तरह बंद तो नहीं होंगे, लेकिन उनकी गति और समयबद्धता निश्चित रूप से प्रभावित होगी। हालांकि हैंडपंप मरम्मत जैसे नियमित और आवश्यक कार्यों में विशेष कठिनाई नहीं आती, लेकिन बड़े विकास कार्यों के लिए जिलाधिकारी स्तर की स्वीकृति अनिवार्य होने से प्रक्रिया लंबी हो जाती है। शिव शंकर सिंह का मानना है कि गांव के आम लोगों पर इसका सीधा असर कम दिखाई देगा, लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन में विलंब अवश्य महसूस होगा। चुनावी वर्ष में विकास कार्यों की रफ्तार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जिन कार्यों को पांच वर्षों में पूरा नहीं किया जा सका, उन्हें कुछ महीनों में पूरा कर लेना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए नई व्यवस्था में विकास की गति प्रशासनिक स्वीकृतियों और बजट की उपलब्धता पर ही निर्भर करेगी।
फाइलों की लंबी प्रक्रिया से विकास की रफ्तार होगी प्रभावित : रामबाबू पटेल
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन अंतर्गत ग्राम पंचायत दिनदासपुर के प्रशासक रामबाबू पटेल से बातचीत की। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लगभग प्रत्येक विकास कार्य की फाइल जिलाधिकारी स्तर पर भेजनी पड़ती है, जिससे स्वीकृति मिलने में समय लगता है और कार्यों के क्रियान्वयन में स्वाभाविक रूप से विलंब होता है। उनका मानना है कि गांवों का विकास पहले की तरह जारी रहेगा, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी होने के कारण योजनाओं को धरातल पर उतारने में पहले जैसी गति नहीं रह पाएगी। उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि विकास कार्यों की स्वीकृति और धनराशि निर्गत करने की प्रक्रिया को पहले की तरह सरल और त्वरित बनाया जाए, ताकि ग्राम पंचायतों में आवश्यक कार्य बिना अनावश्यक विलंब के पूरे हो सकें। चुनावी वर्ष में विकास कार्यों की रफ्तार पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह उपलब्ध बजट और समय पर मिलने वाली प्रशासनिक स्वीकृतियों पर निर्भर करेगा। यदि निर्धारित अवधि में पर्याप्त बजट और समय पर अनुमोदन मिलता रहा तो विकास कार्य चलते रहेंगे, अन्यथा प्रक्रिया में होने वाली देरी का असर योजनाओं की गति पर अवश्य दिखाई देगा।
स्वीकृति प्रक्रिया तेज हो तो विकास कार्यों में नहीं आएगी बाधा : रामशरण
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन अंतर्गत ग्राम पंचायत भिखारीपुर के प्रशासक रामशरण से बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रशासक बनने के बाद अधिकारों में बहुत बड़ा परिवर्तन भले न दिखाई दे, लेकिन विकास कार्यों की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक औपचारिक हो गई है। अब किसी भी योजना को शुरू करने से पहले आवश्यक अभिलेख, प्राक्कलन और अन्य औपचारिकताएं पूरी कर फाइल जिला स्तर से स्वीकृत करानी पड़ती है, जिसके बाद ही कार्य शुरू हो सकता है। उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि ग्राम पंचायतों को समय पर पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि अधूरे और लंबित विकास कार्यों को बिना विलंब पूरा कराया जा सके। उनका कहना है कि यदि धनराशि और प्रशासनिक स्वीकृतियां समय पर मिलती रहें तो गांव के लोगों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी और विकास कार्य लगातार चलते रहेंगे। चुनावी वर्ष में विकास की रफ्तार पर उन्होंने कहा कि योजनाओं की गति उपलब्ध बजट और स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी तथा ग्राम पंचायत की आवश्यकता और क्षमता के अनुरूप धनराशि मिलने पर विकास कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ सकेंगे।
स्वतंत्र निर्णय समाप्त, धीमी प्रक्रिया से विकास होगा प्रभावित : सीमा
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन अंतर्गत ग्राम पंचायत बसंतपुर की प्रशासक सीमा से बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रशासक बनने के बाद सबसे बड़ा बदलाव निर्णय लेने की स्वतंत्रता समाप्त होने के रूप में सामने आया है। पहले ग्राम पंचायत की आवश्यकताओं के अनुसार तत्काल निर्णय लेकर विकास कार्य शुरू करा दिए जाते थे, लेकिन अब प्रत्येक कार्य के लिए फाइल जिला स्तर पर भेजनी पड़ती है, जिसकी स्वीकृति मिलने में समय लगने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि जब तक नई ग्राम पंचायतों का गठन नहीं हो जाता, तब तक विकास कार्यों के संचालन के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे ग्राम स्तर पर योजनाएं बिना अनावश्यक विलंब के आगे बढ़ सकें। सीमा का मानना है कि यदि स्वीकृति प्रक्रिया इसी तरह लंबी रही तो गांवों में विकास कार्यों की गति धीमी पड़ेगी और इसका सीधा असर आम ग्रामीणों पर दिखाई देगा। चुनावी वर्ष में विकास की रफ्तार पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान व्यवस्था में विकास कार्यों की गति पहले की तुलना में काफी कम रहने की आशंका है, क्योंकि प्रत्येक योजना प्रशासनिक स्वीकृतियों पर निर्भर हो गई है।
स्वतंत्रता घटी, लेकिन विकास की रफ्तार नहीं रुकने दूंगा : राम प्रकाश पटेल
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन अंतर्गत ग्राम पंचायत बवानिया के प्रशासक राम प्रकाश पटेल से बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रशासक बनने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि अब विकास कार्यों के संबंध में पहले जैसी स्वतंत्र निर्णय लेने की व्यवस्था नहीं रही। ग्राम प्रधान रहते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्ताव बनाकर कार्य कराए जाते थे, जबकि अब प्रत्येक प्रस्ताव को जिलाधिकारी स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद ही अमल में लाया जा सकता है। इसके बावजूद उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए गांव के विकास की गति बनाए रखने का पूरा प्रयास किया जाएगा। राम प्रकाश पटेल ने दावा किया कि उनके पिछले कार्यकाल में गांव की अधिकांश मूलभूत समस्याओं का समाधान कराया जा चुका है। सड़क, नाली, सीवर, पेयजल, शौचालय, पेंशन तथा दिव्यांग और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी आर्थिक बोझ के पहुंचाने का प्रयास किया गया, जिससे अधिकांश ग्रामीण संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि अब केवल कुछ छोटे विकास कार्य शेष हैं, जिन्हें बजट उपलब्ध होते ही प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। उन्होंने माना कि नई व्यवस्था में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक स्वीकृतियों की लंबी प्रक्रिया है, लेकिन सभी योजनाओं के ऑनलाइन होने से पारदर्शिता पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। अंत में उन्होंने ग्रामवासियों से विकास कार्यों में सहयोग और विश्वास बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता निष्पक्ष, पारदर्शी और ईमानदार तरीके से प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और ग्राम पंचायत के समग्र विकास को निरंतर आगे बढ़ाना है।
Comments (0)