वाराणसी। ग्राम पंचायतों की सत्ता का स्वरूप बदला है तो गांव की सरकार चलाने का तरीका भी बदल गया है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक की जिम्मेदारी तो मिली, लेकिन नई व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया को लेकर गांवों से अलग-अलग तस्वीर सामने आ रही है। कोई प्रशासक व्यवस्था को सामान्य बताते हुए विकास कार्य निर्बाध चलने की बात कर रहा है तो कोई पहले जैसी निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं होने और स्वीकृति की लंबी प्रक्रिया को विकास की राह में बाधा बता रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब गांव की सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता और दूसरी बुनियादी जरूरतों का सामना स्थानीय स्तर पर करना है तो उनके समाधान के लिए प्रशासकों के हाथ कितने खुले हैं? इसी सवाल की जमीनी हकीकत जानने के लिए परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रशासकों से बातचीत की। सामने आए अनुभव एक जैसे नहीं हैं। कुछ प्रशासकों का कहना है कि व्यवस्था बदलने के बावजूद विकास कार्य सुचारु रूप से चल रहे हैं और नई प्रक्रिया से कोई बड़ी परेशानी नहीं है, जबकि कई प्रशासकों का कहना है कि पहले गांव की जरूरत देखकर जिस कार्य पर तत्काल निर्णय लिया जा सकता था, अब उसके लिए कार्ययोजना, एस्टीमेट और विभिन्न स्तरों से स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ रही है। इससे कई बार जरूरी काम शुरू होने में देरी होती है और ग्रामीणों की अपेक्षाओं का दबाव स्थानीय प्रशासकों पर बढ़ता है।
कुछ ने तो यहां तक कहा कि जिम्मेदारी उनके पास है, लेकिन अधिकार पहले जैसे नहीं रहे। वहीं कुछ प्रशासकों ने सरकार की व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे पंचायत की धनराशि के बेहतर और पारदर्शी उपयोग की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। ऐसे में आराजीलाइन की ग्राम पंचायतों से सामने आए ये अलग-अलग स्वर नई व्यवस्था की जमीनी तस्वीर पेश करते हैं—जहां एक ओर विकास जारी रखने का दावा है, वहीं दूसरी ओर अधिकार, स्वीकृति और समयबद्ध कार्यों को लेकर सवाल और सुझाव भी हैं।
परफेक्ट मिशन की इस विशेष श्रृंखला में पढ़िए ग्राम पंचायतों के प्रशासकों की जुबानी—नई व्यवस्था में गांव की सरकार चलाने का उनका अनुभव, विकास की चुनौतियां और सरकार से उनकी अपेक्षाएं।
प्रशासक अल्पना पांडे बोलीं—नई व्यवस्था में विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। नई व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन के प्रतिनिधि ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत पयागपुर की प्रशासक अल्पना पांडे से बातचीत की। अल्पना पांडे ने बताया कि प्रशासक बनने के बाद पहले की तरह स्वतंत्र रूप से निर्णय लेकर तत्काल विकास कार्य कराना संभव नहीं रह गया है। अब किसी भी विकास कार्य के लिए पहले कार्ययोजना तैयार करनी पड़ती है, जिसके बाद संबंधित पत्रावली जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय भेजी जाती है और वहां से स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होकर ब्लॉक स्तर पर आने के बाद ही कार्य आगे बढ़ पाता है।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के कारण गांव में विकास कार्य पहले जैसी गति से नहीं हो पा रहे हैं। इसका सीधा असर ग्रामीणों की अपेक्षाओं पर भी पड़ता है, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसकी समस्या और उसके क्षेत्र से जुड़ा कार्य प्राथमिकता से हो। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है कि गांव में विकास कार्य नहीं हुए हैं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्था के तहत आवश्यक कार्य कराए गए हैं, लेकिन नई प्रक्रिया के कारण विकास कार्यों को पहले जैसी तेजी से आगे बढ़ाने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं।
प्रशासक धर्मेंद्र सिंह बोले—स्वीकृति की प्रक्रिया बदली, विकास कार्यों में बाधा नहीं
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत पचाई के प्रशासक धर्मेंद्र सिंह से बातचीत की। धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासक बनने के बाद अधिकारों में बहुत अधिक अंतर नहीं आया है, लेकिन विकास कार्य कराने की प्रक्रिया में बदलाव जरूर हुआ है।
पहले ग्राम पंचायत स्तर पर कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाता था, जबकि अब कार्ययोजना और एस्टीमेट तैयार करने के बाद जिलाधिकारी से स्वीकृति लेकर कार्य कराना होता है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के बावजूद गांव के विकास कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी नहीं आ रही है और सभी आवश्यक कार्य सुचारु रूप से हो रहे हैं। शासन और प्रशासन से भी उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं है। धर्मेंद्र सिंह ने सरकार की व्यवस्था पर संतोष जताते हुए कहा कि निर्धारित प्रक्रिया और अधिकारियों से आवश्यक स्वीकृति लेकर ग्राम पंचायत के विकास कार्य लगातार कराए जा रहे हैं।
प्रशासक अजय बोले—धन का सही उपयोग बढ़ा, स्वीकृति प्रक्रिया से थोड़ी परेशानी
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत मरूई के प्रशासक अजय से बातचीत की। अजय ने नई व्यवस्था को ग्राम पंचायतों के हित में बताते हुए कहा कि पहले प्रशासक स्तर पर विकास की जो सोच और योजनाएं बनती थीं, वे कई बार ब्लॉक स्तर तक ही सीमित रह जाती थीं और ग्राम पंचायत को मिलने वाली धनराशि का अपेक्षित रूप से विकास कार्यों में उपयोग नहीं हो पाता था।
सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के बाद पंचायत को मिलने वाली धनराशि का गांव के विकास में बेहतर और सही उपयोग हो रहा है। हालांकि विकास कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया पहले की अपेक्षा थोड़ी लंबी हुई है। पहले जिन कार्यों की फाइल ग्राम पंचायत स्तर से आसानी से आगे बढ़ जाती थी, अब उन्हें खंड विकास अधिकारी और संबंधित अधिकारियों के माध्यम से जिला स्तर पर भेजकर स्वीकृति लेनी पड़ती है, जिससे कभी-कभी कार्य शुरू होने में देरी होती है। इसके बावजूद विकास कार्य कराने में कोई बड़ी समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की जो सुविधाएं और आवश्यक कार्य पहले रुके रहते थे, उन्हें अब प्रधान के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास हो रहा है। इस व्यवस्था के लिए उन्होंने सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इसका लाभ ग्राम पंचायत और ग्रामीणों को मिल रहा है।
प्रशासक राजबली पटेल बोले—स्वीकृति की बाध्यता बढ़ी, विकास कार्य जारी
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत मनियारीपुर के प्रशासक राजबली पटेल से बातचीत की। राजबली पटेल ने कहा कि प्रधान एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होता है, जबकि प्रशासक के रूप में उसकी भूमिका और कार्यप्रणाली में बदलाव आया है, हालांकि अधिकारों में बहुत अधिक अंतर नहीं है।
पहले ग्राम पंचायत स्तर पर कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाता था, लेकिन अब कार्ययोजना और एस्टीमेट तैयार करने के बाद जिलाधिकारी से स्वीकृति लेना आवश्यक है और आदेश मिलने के बाद ही संबंधित कार्य कराया जा सकता है। इसके बावजूद गांव के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में कोई बड़ी परेशानी नहीं हो रही है और वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। राजबली पटेल ने सरकार की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने ग्राम प्रधानों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया है और इसके लिए वह सरकार के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं है और नियमानुसार स्वीकृति प्राप्त कर ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को बेहतर ढंग से कराने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासक विजय श्रीवास्तव बोले—अधिकार सीमित होने से विकास की रफ्तार प्रभावित
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत काशीपुर के प्रशासक विजय कुमार श्रीवास्तव से बातचीत की। विजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रशासक बनने के बाद अधिकारों में काफी बदलाव आया है और पहले जैसी निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं रही। पहले गांव में किसी समस्या या विकास कार्य की आवश्यकता सामने आने पर ग्राम पंचायत स्तर से तत्काल निर्णय लेकर कार्य कराया जा सकता था, लेकिन अब किसी भी कार्य को कराने से पहले जिलाधिकारी से स्वीकृति लेनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि बदली हुई व्यवस्था के कारण विकास कार्यों में व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं और पहले जैसी स्थिति नहीं रह गई है। गांव में कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनका तत्काल समाधान जरूरी होता है, लेकिन स्वीकृति की प्रक्रिया के कारण तुरंत कार्य कराना संभव नहीं हो पाता। विजय कुमार श्रीवास्तव ने सरकार से अपेक्षा जताई कि ग्राम पंचायत के प्रशासकों को पहले की तरह आवश्यक अधिकार दिए जाएं, ताकि गांव में अचानक सामने आने वाली समस्याओं और विकास संबंधी जरूरतों का बिना अनावश्यक विलंब के समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत की वास्तविक जरूरतों को स्थानीय स्तर पर बेहतर ढंग से समझा जा सकता है, इसलिए विकास कार्यों में त्वरित निर्णय लेने की व्यवस्था रहने से ग्रामीणों को समय पर सुविधाएं मिल सकेंगी।
प्रशासक चंदा देवी बोलीं—अधिकार घटने से गांव के विकास कार्य प्रभावित
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत कर्नाडांड़ी की प्रशासक चंदा देवी से बातचीत की। चंदा देवी ने कहा कि प्रशासक बनाए जाने के बाद पहले की तुलना में अधिकार काफी सीमित हो गए हैं, जिससे गांव में विकास कार्य कराने में परेशानी आ रही है। पहले ग्राम प्रधान के रूप में गांव की आवश्यकता को देखते हुए जरूरी कार्यों पर तत्काल निर्णय लेकर उन्हें कराया जा सकता था, लेकिन अब किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले जिलाधिकारी से स्वीकृति लेना आवश्यक हो गया है।
इसके चलते कई जरूरी कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक तो बना दिया है, लेकिन पहले की तरह स्वतंत्र रूप से विकास कार्य कराने की व्यवस्था नहीं रहने से इस जिम्मेदारी का प्रभाव सीमित हो गया है। चंदा देवी ने सरकार से अपेक्षा जताई कि प्रशासकों को गांव की जरूरत के अनुसार आवश्यक कार्य कराने के लिए पहले की तरह पर्याप्त अधिकार दिए जाएं। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था का असर ग्रामीणों पर भी पड़ रहा है, क्योंकि पहले किसी समस्या या जरूरी काम की मांग सामने आने पर तत्काल समाधान का प्रयास किया जाता था, जबकि अब स्वीकृति मिलने तक कार्य आगे नहीं बढ़ पाता और ग्रामीणों को इंतजार करना पड़ता है।
प्रशासक विवके सिंह बोले—व्यवस्था सामान्य, लेकिन पहले जैसे अधिकार नहीं
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रमुख प्रक्रियाओं में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत कुण्डरिया के प्रशासक विवके सिंह से बातचीत की। विवेक कुमार ने कहा कि प्रशासक बनने के बाद ग्राम पंचायत की सामान्य कार्यप्रणाली में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है और कामकाज पहले की तरह चल रहा है।
उनका मानना है कि गांव के विकास कार्यों पर भी इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा और विकास की प्रक्रिया पूर्ववत जारी रहेगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राम प्रधान के रूप में जो अधिकार प्राप्त थे, वे प्रशासक बनने के बाद उसी स्वरूप में नहीं रह गए हैं। इसके बावजूद पंचायत के नियमित कामकाज और गांव के विकास को आगे बढ़ाने में फिलहाल किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
प्रशासक पंकज पाण्डेय बोले—सिर्फ नाम की जिम्मेदारी, अधिकार हुए सीमित
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत कुरौना के प्रशासक पंकज पाण्डेय से बातचीत की। पंकज पाण्डेय ने मौजूदा व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए कहा कि प्रशासक बनाए जाने के बाद ग्राम प्रधान के रूप में प्राप्त अधिकार काफी हद तक सीमित कर दिए गए हैं और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेकर विकास कार्य कराने की स्थिति नहीं रह गई है।
पंकज पाण्डेय का कहना है कि विकास कार्यों से संबंधित फाइलें स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजी जा रही हैं, जहां से वापस आने में दो से तीन महीने तक का समय लग रहा है। इसके कारण गांव में आवश्यक विकास कार्य समय पर शुरू नहीं हो पा रहे हैं और उनकी गति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासक की जिम्मेदारी तो दी गई है, लेकिन पहले की तरह अधिकार नहीं रहने से यह व्यवस्था केवल नाम भर की प्रतीत हो रही है। इसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ रहा है, क्योंकि उनकी आवश्यक सुविधाओं और समस्याओं से जुड़े कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। दिवाकर पांडे ने कहा कि गांव की जरूरतों के अनुसार तत्काल निर्णय लेकर कार्य कराने की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को जरूरी सुविधाओं के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रशासक रविन्द्र बोले—मोहर और हस्ताक्षर तक सिमटे अधिकार, विकास प्रभावित
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को पंचायत का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत कोरौती के प्रशासक रविन्द्र से बातचीत की। रविन्द्र ने मौजूदा व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासक बनने के बाद स्वतंत्र रूप से विकास कार्य कराने की स्थिति नहीं रह गई है और वे केवल नाम के प्रशासक बनकर रह गए हैं। उनका कहना है कि पहले ग्राम प्रधान के रूप में गांव की जरूरत के अनुसार निर्णय लेकर कार्य कराया जा सकता था, लेकिन अब विकास कार्यों के लिए कार्ययोजना बनाकर ब्लॉक स्तर पर देनी पड़ती है और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही काम आगे बढ़ पाता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में प्रशासक के पास मोहर और हस्ताक्षर करने के अलावा बहुत सीमित अधिकार रह गए हैं, जिससे गांव के जरूरी विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकार से अपेक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले की तरह कार्य करने की स्वतंत्रता और आवश्यक अधिकार मिलने चाहिए, तभी ग्राम पंचायत में विकास की गति तेज हो सकेगी। चुनावी वर्ष में विकास कार्यों की रफ्तार को लेकर रविद्र ने कहा कि जब प्रशासकों के हाथ में पर्याप्त अधिकार ही नहीं होंगे तो उनसे तेज गति से विकास कार्य कराने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। उनका आरोप है कि पहले ग्राम प्रधानों के कई अधिकार सीमित किए गए और अब प्रशासक बनाए जाने के बाद शेष अधिकार भी काफी हद तक कम हो गए हैं। ऐसे में केवल प्रशासक नियुक्त कर देने से गांव की विकास संबंधी जरूरतों को समय पर पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
प्रशासक प्रशांत कुमार बोले—अधिकार मिले तो गांव में तेज होंगे विकास कार्य
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत जक्खिनी के प्रशासक प्रशांत कुमार उपाध्याय से बातचीत की। प्रशांत कुमार उपाध्याय ने कहा कि प्रशासक बनने के बाद कोई विशेष बदलाव नहीं आया, लेकिन पहले की तरह स्वतंत्र रूप से निर्णय लेकर विकास कार्य कराने का अधिकार भी नहीं रह गया है। किसी भी कार्य को आगे बढ़ाने के लिए जिलाधिकारी की स्वीकृति आवश्यक है, जिसके बिना प्रशासक अपने स्तर से कार्य नहीं करा सकता।
उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में गांव के विकास कार्य पहले जैसी गति से हो पाना मुश्किल है, क्योंकि कार्य से संबंधित पत्रावली को पंचायत स्तर से विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी और जिलाधिकारी स्तर तक जाना पड़ता है। इससे स्वीकृति मिलने और कार्य शुरू होने में समय लग जाता है, जबकि ग्रामीणों की अपेक्षा रहती है कि उनकी समस्याओं और जरूरतों से जुड़े कार्य शीघ्र पूरे हों। प्रशांत कुमार ने सरकार से अपेक्षा जताई कि प्रशासकों को ग्राम पंचायत की आवश्यकता के अनुसार विकास कार्य कराने के लिए पर्याप्त अधिकार दिए जाएं, ताकि छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लंबी स्वीकृति प्रक्रिया का इंतजार न करना पड़े और ग्रामीणों की बढ़ती अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्य समय से पूरे किए जा सकें।
प्रशासक अमरावती देवी बोलीं—जन्म-मृत्यु पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया से ग्रामीण परेशान
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत हरदत्तपुर की प्रशासक अमरावती देवी से बातचीत की। अमरावती देवी ने कहा कि प्रशासक बनने के बाद मुख्य रूप से मोहर और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव हुआ है, जबकि पंचायत का काम निर्धारित समितियों और प्रक्रियाओं के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। गांव के विकास कार्यों को भी सभी को साथ लेकर आवश्यकता और प्राथमिकता के अनुसार कराने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में जन्म-मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर परेशानी बताई। उनका कहना है कि जन्म के 21 दिन के भीतर पंजीकरण नहीं हो पाने पर बाद की प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती है और तहसील से लेकर खंड विकास स्तर तक विभिन्न औपचारिकताएं और रिपोर्ट पूरी कराने में आम लोगों को चक्कर लगाने पड़ते हैं। विशेष रूप से ऐसे बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में समस्या आ रही है जो अब हाईस्कूल तक पहुंच चुके हैं और जिनके पुराने जन्म संबंधी अभिलेख आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
ऐसे मामलों में आशा और आंगनबाड़ी स्तर से भी आवश्यक अभिलेख या प्रमाण मिलने में कठिनाई होने से परिवार परेशान होते हैं। अमरावती देवी ने सरकार से अपेक्षा जताई कि पुराने और विलंबित जन्म पंजीकरण के मामलों के लिए प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक बनाया जाए, ताकि ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और पात्र लोगों के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र समय से बन सकें।
प्रशासक विजय बोले—अधिकार सीमित हुए, फिर भी जारी रहेगा गांव का विकास
वाराणसी (परफेक्ट मिशन)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस व्यवस्था में अधिकारों और विकास कार्यों की प्रक्रिया में आए बदलाव को लेकर परफेक्ट मिशन ने विकास खंड आराजीलाइन की ग्राम पंचायत गौर के प्रशासक विजय से बातचीत की। विजय ने कहा कि प्रशासक बनने के बाद पंचायत की सामान्य कार्यप्रणाली में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है और गांव में विकास कार्य लगातार हो रहे हैं।
हालांकि उन्होंने माना कि ग्राम प्रधान के रूप में पहले जो अधिकार प्राप्त थे, प्रशासक बनने के बाद वे अधिकार उसी रूप में नहीं रह गए हैं। इसके बावजूद उनका कहना है कि इसका ग्रामीणों पर कोई विशेष नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और पंचायत में कामकाज सामान्य रूप से चलता रहेगा। चुनावी वर्ष में विकास कार्यों की रफ्तार को लेकर विजय ने कहा कि प्रशासक के रूप में कार्यकाल छह महीने बढ़ने और आगे भी समय मिलने की स्थिति में गांव के विकास कार्य स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि उपलब्ध व्यवस्था और संसाधनों के तहत ग्राम पंचायत की जरूरतों के अनुरूप विकास कार्य जारी रखे जाएंगे।
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