बरसात में छोटी लापरवाही भी बन सकती है बड़ी बीमारी का कारण : डॉ. एससी गुप्ता
वाराणसी। बदलते मौसम के साथ बदलती बीमारियां भी आज समाज के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। खासकर बरसात का मौसम संक्रमण, वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, एलर्जी और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। दूसरी ओर आधुनिक जीवनशैली ने युवाओं को भी डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और थायरॉयड जैसी गंभीर बीमारियों की ओर तेजी से धकेल दिया है। ऐसे समय में केवल इलाज ही नहीं, बल्कि सही जानकारी और समय रहते बचाव सबसे प्रभावी हथियार बन जाता है।
इन्हीं महत्वपूर्ण विषयों पर परफेक्ट मिशन के प्रतिनिधि ने लहरतारा स्थित बसंत मेडिकेयर क्लिनिक के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एस.सी. गुप्ता (एम.बी.बी.एस., एम.डी. मेडिसिन) से विशेष बातचीत की। हृदय रोग, डायबिटीज, थायरॉयड, अस्थमा और सामान्य चिकित्सा के क्षेत्र में लंबे अनुभव रखने वाले डॉ. गुप्ता ने न केवल मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय बताए, बल्कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों और स्वस्थ रहने के मूल मंत्र पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश—
बरसात की बूंदों के साथ क्यों बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा?
डॉ. गुप्ता कहते हैं कि बारिश का मौसम जितना सुहावना दिखाई देता है, स्वास्थ्य की दृष्टि से उतना ही संवेदनशील भी होता है। वातावरण में बढ़ी नमी बैक्टीरिया और वायरस को तेजी से पनपने का अवसर देती है। ऐसे में जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, विशेषकर बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार व्यक्ति, वे संक्रमण का सबसे आसान शिकार बन जाते हैं। वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, गले का संक्रमण, एलर्जी और सांस संबंधी रोग इस मौसम में तेजी से बढ़ते हैं। इसलिए बरसात का आनंद लेते समय स्वास्थ्य के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी है।
थाली में पहुंचने से पहले कैसे बीमारी का रूप ले लेता है खुला भोजन?
बरसात के दिनों में मक्खियों और कीड़े-मकोड़ों की संख्या बढ़ जाती है। डॉ. गुप्ता बताते हैं कि यही मक्खियां गंदगी से निकलकर खुले भोजन पर बैठती हैं और अपने साथ खतरनाक बैक्टीरिया एवं वायरस भी भोजन तक पहुंचा देती हैं। यही कारण है कि इस मौसम में डायरिया, हैजा, फूड प्वाइजनिंग और पेट के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। वे सलाह देते हैं कि भोजन हमेशा ढककर रखें, बासी खाने से बचें और केवल स्वच्छ एवं सुरक्षित पानी का ही सेवन करें। छोटी-सी सावधानी बड़ी बीमारी से बचा सकती है।
नमी बढ़ते ही क्यों बिगड़ने लगती है सांस के मरीजों की हालत?
डॉ. एस.सी. गुप्ता के अनुसार वातावरण में बढ़ी नमी केवल संक्रमण ही नहीं बढ़ाती, बल्कि अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित लोगों की परेशानी भी कई गुना बढ़ा देती है। फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से सांस लेने में कठिनाई, लगातार खांसी और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसके साथ ही जलभराव मच्छरों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियां तेजी से फैलती हैं। वे कहते हैं कि घर और आसपास पानी जमा न होने देना भी स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आधुनिक जीवनशैली क्यों बना रही है युवाओं को समय से पहले बीमार?
एक समय था जब डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। डॉ. गुप्ता बताते हैं कि देर रात तक जागना, मोबाइल और कंप्यूटर के सामने घंटों बिताना, फास्ट फूड की बढ़ती आदत, तनाव, व्यायाम की कमी और अपर्याप्त नींद ने युवाओं के शरीर का संतुलन बिगाड़ दिया है। परिणामस्वरूप कम उम्र में ही डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, मोटापा और थायरॉयड जैसी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते जीवनशैली नहीं बदली गई तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
समय पर जांच क्यों बन सकती है जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा?
डॉ. गुप्ता का कहना है कि अधिकांश गंभीर बीमारियां शुरुआती दौर में बिना किसी बड़े लक्षण के शरीर में विकसित होती रहती हैं। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद आवश्यक है। 40 वर्ष से कम आयु के लोगों को समय-समय पर सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यकता अनुसार सीबीसी जैसी जांच करानी चाहिए। वहीं 40 वर्ष की आयु पार करने के बाद ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, किडनी फंक्शन, ब्लड प्रेशर तथा अन्य आवश्यक जांच नियमित रूप से कराते रहना चाहिए। समय पर जांच से बीमारी का पता जल्दी चलता है और उपचार भी अधिक प्रभावी साबित होता है।
दवा से पहले दिनचर्या बदलिए, आधी बीमारियां खुद दूर हो जाएंगी
डॉ. एस.सी. गुप्ता स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि केवल दवाइयों के भरोसे स्वस्थ नहीं रहा जा सकता। यदि व्यक्ति की दिनचर्या असंतुलित है तो दवाओं का असर भी सीमित हो जाता है। सुबह समय पर उठना, नियमित योग और व्यायाम करना, संतुलित एवं पौष्टिक भोजन लेना, पर्याप्त नींद लेना, तनाव को नियंत्रित रखना और चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा लेना स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव है। वे विशेष रूप से रात का भोजन हल्का रखने और प्रतिदिन कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालने की सलाह देते हैं।
मरीज की मुस्कान ही चिकित्सक की होती है सबसे बड़ी उपलब्धि'
डॉ. एस.सी. गुप्ता बताते हैं कि चिकित्सा उनके लिए केवल पेशा नहीं बल्कि मानवीय सेवा का माध्यम है। एम.बी.बी.एस. और एम.डी. (मेडिसिन) की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे वर्षों से मरीजों के उपचार में समर्पित हैं। वर्तमान में वे लहरतारा स्थित बसंत मेडिकेयर क्लिनिक में नियमित रूप से मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इसके साथ ही शहर के कई निजी अस्पतालों में विजिटिंग फिजिशियन के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका मानना है कि डॉक्टर की वास्तविक सफलता मरीज के चेहरे पर लौटती मुस्कान और उसके स्वस्थ जीवन में छिपी होती है।
बीमारी का इंतजार मत कीजिए, स्वास्थ्य को अपनी पहली प्राथमिकता बनाइए
बातचीत के अंत में डॉ. एस.सी. गुप्ता समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। उनका कहना है कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। लोग अक्सर बीमारी होने के बाद डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जबकि स्वास्थ्य की रक्षा पहले से ही शुरू कर देनी चाहिए। यदि प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता, संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और सकारात्मक दिनचर्या को अपनी आदत बना ले, तो अनेक गंभीर बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है। उनके शब्दों में, "स्वास्थ्य पर किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता, क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति ही अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए सबसे बड़ी शक्ति बनता है।"
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