वाराणसी। रिमझिम बारिश, ठंडी हवाएं और हरियाली से सराबोर मौसम हर किसी को आकर्षित करता है, लेकिन यही मौसम कई संक्रामक बीमारियों के तेजी से फैलने का भी सबसे अनुकूल समय माना जाता है। वायरल बुखार, सर्दी-खांसी, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और पेट संबंधी संक्रमण हर वर्ष हजारों लोगों को अपनी चपेट में लेते हैं। थोड़ी सी लापरवाही पूरे परिवार की सेहत पर भारी पड़ सकती है, जबकि समय रहते अपनाई गई छोटी-छोटी सावधानियां इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव कर सकती हैं। बरसात के मौसम में संक्रमण से बचाव, खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी उपायों पर परफेक्ट मिशन के प्रतिनिधि ने लहरतारा स्थित दवा पैलेस के संचालक/चिकित्सक डॉ. अमित यादव से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस उपयोगी संवाद के प्रमुख अंश—
बरसात में कौन-कौन सी बीमारियां सबसे तेजी से फैलती हैं?
डॉ. अमित यादव बताते हैं कि बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण सबसे अधिक देखने को मिलता है। गले में खराश, सर्दी-जुकाम, लगातार खांसी, बुखार, मलेरिया, टाइफाइड तथा पेट से जुड़ी समस्याएं इस मौसम में आम हो जाती हैं। दूषित पानी, गंदगी और बदलते मौसम के कारण लोगों में पाचन संबंधी शिकायतें, पेट दर्द और संक्रमण तेजी से बढ़ते हैं। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा क्यों सबसे ज्यादा जरूरी है?
डॉ. अमित यादव का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए संक्रमण का खतरा उनमें अधिक रहता है। यदि घर में किसी व्यक्ति को सर्दी, खांसी या वायरल संक्रमण है तो उसे बच्चों और बुजुर्गों के सीधे संपर्क से बचाना चाहिए। व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ वातावरण और समय-समय पर हाथ धोने जैसी आदतें संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बरसात में खान-पान की छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी
डॉ. अमित यादव सलाह देते हैं कि इस मौसम में बाहर मिलने वाले खुले, बासी और जंक फूड से यथासंभव दूरी बनानी चाहिए। घर का ताजा, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। दूषित भोजन और अस्वच्छ पानी कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं, इसलिए भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
बारिश में भीगने के बाद क्या करें ताकि बीमारी से बच सकें?
डॉ. अमित यादव के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बारिश में भीग जाए तो घर पहुंचते ही गीले कपड़े बदलकर स्नान कर लेना चाहिए। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए पौष्टिक भोजन करें और बाहरी जंक फूड से बचें। यह छोटी-सी सावधानी भी कई बीमारियों से सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
सामान्य फ्लू और गंभीर संक्रमण की पहचान कैसे करें?
डॉ. अमित यादव बताते हैं कि सामान्य फ्लू में हल्का बुखार, सर्दी या खांसी एक-दो दिन में घरेलू देखभाल से ठीक होने लगती है। लेकिन यदि बुखार लगातार बना रहे, कमजोरी बढ़ती जाए या परेशानी कम न हो तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित उपाय है।
लगातार खांसी और जुकाम को हल्के में न लें
डॉ. अमित यादव कहते हैं कि यदि दो से तीन दिन तक लगातार खांसी या जुकाम बना रहे और दिक्कत कम न हो रही हो, तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार गंभीर संक्रमण की आशंका को काफी हद तक कम कर देता है।
डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड से बचाव का सबसे कारगर तरीका
डॉ. अमित यादव के अनुसार इन बीमारियों से बचने के लिए घर और आसपास कहीं भी पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि यही मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण है। रात में मच्छरदानी का उपयोग करें, साफ-सुथरा भोजन करें, स्वच्छ पानी पिएं तथा भोजन करने से पहले हाथ अवश्य धोएं। स्वच्छता और सतर्कता ही इन बीमारियों के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।
स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र : अनुशासन और स्वच्छता
परफेक्ट मिशन के पाठकों को संदेश देते हुए डॉ. अमित यादव कहते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए नियमित साफ-सफाई, घर का पौष्टिक भोजन, समय पर योग और व्यायाम तथा संतुलित दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है। बीमारी के शुरुआती लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। उनका मानना है कि "इलाज से बेहतर बचाव है, और बचाव की शुरुआत हमारी दैनिक आदतों से होती है।"
पांच जरूरी सलाह
- घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें।
- बाहर के खुले, बासी और जंक फूड से परहेज करें।
- बारिश में भीगने पर तुरंत कपड़े बदलकर स्नान करें।
- लगातार बुखार, खांसी या कमजोरी होने पर स्वयं दवा न लें, चिकित्सक से सलाह लें।
- नियमित योग, व्यायाम, संतुलित आहार और स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
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