वाराणसी। सावन की फुहारों और बारिश के सुहाने मौसम में अगर बनारस की गलियों में घूमते हुए कुछ खास खाने का मन हो तो पुराने स्वाद की याद दिलाने वाली दुकानें आज भी लोगों को अपनी ओर खींचती हैं। इन्हीं में शामिल है शहर की प्रतिष्ठित श्री राजबंधु स्वीट्स, जहां 100 साल से अधिक पुरानी परंपरा आज भी स्वाद और शुद्धता के साथ कायम है। वर्ष 1887 में शुरू हुई इस दुकान ने बनारस के खानपान की पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
बारिश के मौसम में जहां लोग गरमा-गरम और स्वादिष्ट व्यंजनों की तलाश में रहते हैं, वहीं श्री राजबंधु में मिलने वाली देसी घी से बनी चाट, पूड़ी-सब्जी और मिठाइयां लोगों को खास आकर्षित कर रही हैं। यहां की खासियत यह है कि दुकान में बनने वाले अधिकांश पकवान शुद्ध देसी घी में तैयार किए जाते हैं, जिससे स्वाद के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
चाट के हर स्वाद में बनारस की झलक
श्री राजबंधु की चाट बनारस के चटोरों के बीच खास पहचान रखती है। यहां मिलने वाली चाट में पारंपरिक स्वाद के साथ आधुनिक प्रस्तुति का भी मेल देखने को मिलता है। दुकान पर आने वाले लोग खास तौर पर पापड़ी चाट, आलू टिक्की चाट, कटोरी चाट और मटर टिक्की चाट का स्वाद लेना पसंद करते हैं।
पापड़ी चाट में कुरकुरी पापड़ी के साथ कटे हुए आलू, दाल, मीठी चटनी, तीखी चटनी और दुकान के खास मसाले का इस्तेमाल किया जाता है। ऊपर से आलू भुजिया, हरा धनिया और अनार के दाने डालकर इसे आकर्षक रूप दिया जाता है। देसी घी में तैयार होने के कारण इसकी खुशबू और स्वाद अलग ही अनुभव कराता है।
वहीं आलू टिक्की चाट भी ग्राहकों की पसंदीदा डिश में शामिल है। घी में तली हुई आलू की टिक्की के ऊपर भरपूर दही, चटनी, आलू भुजिया, धनिया और अनार के दाने डालकर इसे परोसा जाता है। इसका स्वाद लोगों को बार-बार यहां आने के लिए मजबूर करता है।
कटोरी चाट बनी खास पहचान
श्री राजबंधु की सबसे चर्चित चीजों में कटोरी चाट भी शामिल है। खास अंदाज में तैयार की जाने वाली यह चाट देखने में जितनी आकर्षक होती है, खाने में उतनी ही स्वादिष्ट भी होती है।
कटोरी को खास तरीके से तैयार किया जाता है, जिसके अंदर आलू टिक्की, दही, पापड़ी, चटनी और अन्य मसालों का मिश्रण भरा जाता है। ऊपर से लच्छेदार गाजर, चुकंदर, आलू भुजिया और अनार के दाने डालकर इसे सजाया जाता है। बारिश के मौसम में गरमा-गरम चाट का यह स्वाद लोगों को खूब पसंद आ रहा है।
इसके अलावा यहां मिलने वाली मटर टिक्की चाट भी लोगों के बीच लोकप्रिय है। इसमें मटर की टिक्की के साथ धनिया, अदरक, अनार के दाने और कुरकुरी पापड़ी का स्वाद मिलता है।
रात में भी मिलती है देसी घी की पूड़ी-सब्जी
श्री राजबंधु की खास बात सिर्फ चाट और मिठाइयां ही नहीं हैं। यहां रात के समय मिलने वाली देसी घी की पूड़ी-सब्जी भी लोगों को खूब पसंद आती है। बारिश के मौसम में गरमा-गरम पूड़ी-सब्जी का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग दुकान पहुंचते हैं।
यहां पूड़ी शुद्ध देसी घी में तैयार की जाती है और इसके साथ दो तरह की स्वादिष्ट सब्जियां परोसी जाती हैं। पारंपरिक मसालों से तैयार इन सब्जियों का स्वाद बनारसी खानपान की पुरानी यादों को ताजा कर देता है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटक भी रात में इस खास व्यंजन का स्वाद जरूर लेना पसंद करते हैं।
केसर वाला दूध भी है खास आकर्षण
श्री राजबंधु की मिठाइयों की भी अपनी अलग पहचान है। यहां का केसर वाला दूध ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय है। दूध को खास तरीके से तैयार कर उसमें केसर, मलाई और ड्राई फ्रूट्स डालकर परोसा जाता है। बारिश के मौसम में गर्मागर्म केसर दूध का स्वाद लोगों को खूब भा रहा है।
दुकान पर आने वाले ग्राहकों से उनकी पसंद के अनुसार दूध में चीनी की मात्रा भी पूछी जाती है, जिससे हर व्यक्ति अपनी पसंद के मुताबिक इसका आनंद ले सके।
शुद्धता और परंपरा हमारी सबसे बड़ी पहचान : चंदन गुप्ता
श्री राजबंधु स्वीट्स के प्रोपराइटर चंदन गुप्ता का कहना है कि उनकी दुकान का उद्देश्य वर्षों पुरानी परंपरा और स्वाद को बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि 1887 से चली आ रही इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए गुणवत्ता और शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में लोग खासतौर पर गरमा-गरम चाट और पूड़ी-सब्जी पसंद करते हैं। इसी को देखते हुए ग्राहकों को बेहतर स्वाद देने का प्रयास किया जाता है। देसी घी का इस्तेमाल हमारी पहचान है और हम चाहते हैं कि हर ग्राहक को वही पुराना बनारसी स्वाद मिले, जिसके लिए श्री राजबंधु जानी जाती है।
बनारस आने वालों की पसंदीदा जगह
बनारस सिर्फ घाटों और आध्यात्मिकता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने खानपान के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां आने वाले पर्यटक बनारसी चाट और मिठाइयों का स्वाद लेना नहीं भूलते। श्री राजबंधु स्वीट्स जैसी पुरानी दुकानें शहर की खानपान संस्कृति को जीवित रखने का काम कर रही हैं।
बारिश की बूंदों के बीच गर्मागर्म चाट, देसी घी की पूड़ी-सब्जी और केसर दूध का स्वाद बनारस की गलियों में एक अलग ही आनंद देता है। यही वजह है कि 100 साल से ज्यादा पुरानी यह दुकान आज भी लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए है।
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