वाराणसी। तेजी से बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान, बढ़ता तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने आज पेट, लीवर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों को आम बना दिया है। ऐसे समय में सही चिकित्सा सलाह और समय पर जांच बेहद जरूरी हो जाती है। इसी विषय पर परफेक्ट मिशन ने वाराणसी के डॉ. अभिषेक गुप्ता (MD, F. Gastro, C. C. Psyh) से विशेष बातचीत की। डॉ. गुप्ता गैस्ट्रो एवं जनरल फिजिशियन हैं तथा डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हार्ट, यूरिनरी, रेस्पिरेटरी और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के उपचार में विशेषज्ञता रखते हैं। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश...
आजकल पेट और लीवर की बीमारियां इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही हैं?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : सबसे बड़ा कारण हमारी बदलती जीवनशैली है। देर रात तक जागना, जंक फूड, अत्यधिक तला-भुना भोजन, तनाव, शारीरिक श्रम की कमी और अनियमित भोजन का समय सीधे हमारे पाचन तंत्र पर असर डालता है। यही कारण है कि पहले जो बीमारियां 50-60 वर्ष की उम्र में दिखाई देती थीं, अब 30-35 वर्ष के युवाओं में भी देखने को मिल रही हैं।
क्या फैटी लीवर आने वाले समय की बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकता है?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : बिल्कुल। आज बड़ी संख्या में ऐसे मरीज आ रहे हैं जिन्हें शुरुआत में कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन जांच में फैटी लीवर की समस्या सामने आती है। यदि समय रहते खान-पान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया तो आगे चलकर लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति भी बन सकती है। नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रित रखना और संतुलित भोजन इसका सबसे प्रभावी उपाय है।
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए आपकी क्या सलाह है?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : मधुमेह और उच्च रक्तचाप ऐसी बीमारियां हैं जिन्हें पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मरीजों को नियमित दवा, समय-समय पर ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच, संतुलित भोजन और रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट की शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद करना या बदलना खतरनाक हो सकता है।
किन लक्षणों को लोग कभी नजरअंदाज न करें?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : यदि लगातार पेट दर्द, गैस, एसिडिटी, खून की उल्टी, काला मल, निगलने में परेशानी, अचानक वजन घटना, बार-बार उल्टी या लगातार कब्ज जैसी समस्या हो रही है तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। कई बार लोग महीनों तक घरेलू इलाज करते रहते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है।
क्या मानसिक तनाव और पाचन तंत्र का कोई संबंध है?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : बिल्कुल है। तनाव का सीधा प्रभाव पेट पर पड़ता है। लगातार तनाव में रहने वाले लोगों में एसिडिटी, गैस, अल्सर और इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का।
बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेने का कितना खतरा है?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : आज इंटरनेट और सोशल मीडिया के कारण लोग स्वयं दवा लेना शुरू कर देते हैं। विशेष रूप से एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाओं का गलत इस्तेमाल लीवर, किडनी और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। हर दवा किसी योग्य चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए।
क्या हमारी थाली ही हमारी सबसे बड़ी दवा भी है और सबसे बड़ा ज़हर भी?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : बिल्कुल। हमारी रसोई ही हमारी पहली दवा है। यदि भोजन संतुलित, ताजा और सही समय पर लिया जाए तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। लेकिन जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी, अत्यधिक नमक और तला-भुना भोजन धीरे-धीरे शरीर को बीमार बनाता है। आज अधिकांश लाइफस्टाइल बीमारियों की शुरुआत हमारी खाने की आदतों से ही होती है।
क्या फैटी लीवर आने वाले वर्षों में भारत की नई महामारी बनने की ओर बढ़ रहा है?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : बिल्कुल। पहले फैटी लीवर केवल शराब पीने वालों में अधिक देखा जाता था, लेकिन अब बिना शराब पीने वाले लोगों में भी तेजी से बढ़ रहा है। मोटापा, डायबिटीज, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। यदि लोगों ने अभी से जीवनशैली नहीं बदली तो आने वाले वर्षों में यह बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन सकती है।
क्या देर रात खाना और मोबाइल की आदत पेट के लिए उतनी ही खतरनाक है जितनी जंक फूड?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : हमारे शरीर की अपनी जैविक घड़ी होती है। देर रात तक जागना, भोजन के तुरंत बाद सो जाना और घंटों मोबाइल स्क्रीन देखना पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। इससे एसिडिटी, गैस, अपच और मोटापा बढ़ता है। अच्छी नींद भी स्वस्थ पाचन के लिए उतनी ही जरूरी है जितना अच्छा भोजन।
डॉक्टर होने के नाते आपको सबसे ज्यादा दुख किस बात का होता है?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : सबसे ज्यादा दुख तब होता है जब मरीज शुरुआती लक्षणों को महीनों तक नजरअंदाज करता है और बीमारी गंभीर होने के बाद अस्पताल पहुंचता है। कई बार समय पर इलाज से बड़ी बीमारी रोकी जा सकती थी। जागरूकता की कमी आज भी सबसे बड़ी चुनौती है।
क्या नियमित हेल्थ चेकअप जरूरी है?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : अक्सर गंभीर बीमारियां शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं देतीं। यदि 35 वर्ष की आयु के बाद वर्ष में कम से कम एक बार स्वास्थ्य जांच कराई जाए तो कई बीमारियों का समय रहते पता चल सकता है और उनका इलाज आसान हो जाता है।
स्वास्थ्य के लिए पांच सरल मंत्र
डॉ. अभिषेक गुप्ता ने लोगों को स्वस्थ रहने के लिए पांच महत्वपूर्ण सुझाव देते हैं—
* समय पर और संतुलित भोजन करें।
* प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम या तेज चाल से चलें।
* तंबाकू, शराब और अत्यधिक जंक फूड से दूरी बनाएं।
* पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें।
* साल में कम से कम एक बार हेल्थ चेकअप अवश्य कराएं।
हमारे पाठकों के लिए आपका क्या संदेश है?
डॉ. अभिषेक गुप्ता : स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है। बीमारी होने का इंतजार मत कीजिए, बल्कि उसे रोकने की कोशिश कीजिए। संतुलित जीवनशैली, नियमित जांच और समय पर विशेषज्ञ की सलाह आपको लंबे समय तक स्वस्थ रख सकती है। यदि शरीर कोई संकेत दे रहा है तो उसे नजरअंदाज न करें। छोटी समस्या का समय पर इलाज ही बड़ी बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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