बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.के. तिवारी से विशेष बातचीत | स्वस्थ बचपन के लिए पोषण, टीकाकरण और सीमित स्क्रीन टाइम पर जोर
वाराणसी। बदलती जीवनशैली और मौसम में हो रहे बदलाव के बीच बच्चों की सेहत को लेकर अभिभावकों की चिंताएं बढ़ रही हैं। मोबाइल और टीवी की स्क्रीन पर बढ़ता समय, वायरल बुखार, एलर्जी, डायरिया, टाइफाइड तथा मच्छरजनित बीमारियों के साथ ही बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक का इस्तेमाल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रहा है। ऐसे में बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित पोषण, समय पर टीकाकरण, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या की भूमिका अहम हो जाती है।
इन्हीं मुद्दों पर परफेक्ट मिशन के प्रतिनिधि ने सान्वी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं सूर्या चिल्ड्रेन हॉस्पिटल, वाराणसी से जुड़े नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.के. तिवारी से विशेष बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों, स्क्रीन टाइम, शारीरिक विकास और एंटीबायोटिक के उचित इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
मौसम बदलते ही बढ़ती हैं बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां
डॉ. तिवारी के अनुसार मौसम में बदलाव के दौरान बच्चों में वायरल बुखार, एलर्जी और अन्य संक्रमणों के मामले सामने आ सकते हैं। दूषित पानी से टाइफाइड और डायरिया तथा मच्छरों से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में बुखार के साथ उल्टी-दस्त, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर अभिभावकों को लापरवाही नहीं करनी चाहिए। बच्चे की स्थिति के अनुसार समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
मां का दूध और संतुलित आहार स्वस्थ विकास की नींव
बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि बच्चों के स्वस्थ विकास में पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका है। नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध बेहद उपयोगी है। लगभग छह महीने की उम्र के बाद बच्चे की जरूरत और उम्र के अनुरूप पूरक आहार शुरू किया जाना चाहिए। बढ़ते बच्चों के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन, खनिज, फल और सब्जियां शामिल हों, ताकि शारीरिक विकास को उचित पोषण मिल सके। बच्चों के खानपान की अच्छी आदतों की शुरुआत घर से ही की जानी चाहिए।
ग्रोथ चार्ट से समझें बच्चे का सही विकास
डॉ. तिवारी ने कहा कि बच्चे के विकास का आकलन केवल वजन के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उम्र और लिंग के अनुरूप बच्चे की लंबाई, वजन तथा समय के साथ होने वाली वृद्धि को देखना अधिक महत्वपूर्ण है। ग्रोथ चार्ट की मदद से यह समझने में सहायता मिलती है कि बच्चे का विकास अपेक्षित दिशा में हो रहा है या नहीं। जरूरत के अनुसार चिकित्सक अन्य मानकों का भी आकलन कर सकते हैं।
मोबाइल की बढ़ती लत से नींद और विकास पर असर
आज के समय में बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम अभिभावकों के लिए चिंता का विषय है। अत्यधिक मोबाइल और टीवी देखने से बच्चों की नींद, शारीरिक गतिविधि, सामाजिक संवाद और भाषा सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। डॉ. तिवारी ने विशेष रूप से दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने की सलाह दी। इसके बाद भी स्क्रीन का इस्तेमाल उम्र के अनुरूप और सीमित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चे को चुप कराने, खाना खिलाने या व्यस्त रखने के लिए मोबाइल को नियमित सहारे के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। बच्चों के लिए खेलकूद, परिवार के साथ संवाद और सक्रिय गतिविधियों का अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
हर बुखार में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं
बच्चों में बुखार आने पर अभिभावकों द्वारा अपने स्तर से एंटीबायोटिक शुरू कर देना चिंता का विषय है। डॉ. तिवारी ने स्पष्ट किया कि एंटीबायोटिक कुछ बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में उपयोगी होती हैं, जबकि वायरल संक्रमण में इनका लाभ नहीं होता। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा देने से दुष्प्रभाव और एंटीबायोटिक प्रतिरोध का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने सलाह दी कि बच्चे को बुखार होने पर योग्य चिकित्सक से जांच कराई जाए। दवा की आवश्यकता, मात्रा और अवधि का निर्धारण चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए। पुरानी पर्ची या मेडिकल स्टोर की सलाह के आधार पर अपने स्तर से एंटीबायोटिक शुरू करने से बचना चाहिए।
साफ पानी और मच्छरों से बचाव पर ध्यान जरूरी
बदलते मौसम में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। भोजन ताजा और पौष्टिक होना चाहिए। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरदानी सहित सुरक्षित उपाय अपनाना और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना जरूरी है।
टीकाकरण का पूरा कार्यक्रम अपनाएं
डॉ. तिवारी ने बच्चों के निर्धारित टीकाकरण कार्यक्रम को पूरा करने पर जोर दिया। कुछ टीकों के बाद हल्का बुखार, इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या सूजन जैसी सामान्य प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। अभिभावकों को टीकाकरण के बाद मिलने वाली चिकित्सकीय सलाह का पालन करना चाहिए और बच्चे का टीकाकरण बीच में नहीं रोकना चाहिए। किसी असामान्य या गंभीर प्रतिक्रिया की स्थिति में चिकित्सक से संपर्क करना आवश्यक है।
बच्चों को स्वस्थ आदतें सिखाने की शुरुआत घर से हो
बाल रोग विशेषज्ञ के मुताबिक बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने के लिए केवल उन्हें उपदेश देना पर्याप्त नहीं है। माता-पिता को स्वयं भी पौष्टिक भोजन, नियमित दिनचर्या और सीमित स्क्रीन टाइम जैसी आदतों का पालन करना चाहिए। घर में जंक फूड और अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों की उपलब्धता कम करने के साथ ही स्वस्थ भोजन का वातावरण तैयार करना जरूरी है। बच्चे अक्सर अपने परिवार के व्यवहार और दिनचर्या से सीखते हैं।
स्वस्थ बचपन के लिए जरूरी बातें
डॉ. एस.के. तिवारी के अनुसार बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए सही पोषण, समय पर पूरा टीकाकरण, पर्याप्त नींद, खेलकूद, सीमित स्क्रीन टाइम, स्वच्छ पानी और भोजन तथा चिकित्सकीय सलाह के बिना दवा से परहेज महत्वपूर्ण हैं। बीमारी से बचाव की आदतें और अभिभावकों की जागरूकता बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की मजबूत नींव तैयार कर सकती हैं।
Comments (0)