मेजा, प्रयागराज। मेजा क्षेत्र के प्रसिद्ध बाबा बोलन धाम में रविवार को दो दिवसीय मेले के प्रथम दिन दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह करीब छह बजे से ही आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ती गई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु आवागमन को देखते हुए नवागत मेजा थाना प्रभारी धनंजय पांडेय पुलिस बल के साथ पूरे समय मुस्तैद रहे।

दोपहर से पहले करीब दस बजे मेले में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने मेजा-मांडा मार्ग पर यातायात व्यवस्था संभाली और आवश्यकतानुसार मार्ग के दोनों ओर आवागमन को नियंत्रित किया। पुलिसकर्मियों ने श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से मंदिर परिसर तक पहुंचाने के साथ ही वाहनों की आवाजाही पर भी नजर रखी। पुलिस की सक्रियता के चलते मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन में सुविधा मिली।

दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने सबसे पहले बाबा बोलन धाम में दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद लोगों ने मेले में लगी दुकानों पर खरीदारी की। विभिन्न स्थानों से आए दुकानदारों ने परिसर में खिलौने, प्रसाद, खान-पान सहित विभिन्न सामानों की दुकानें सजा रखी थीं। इसके अलावा बच्चों के लिए झूले और मनोरंजन के अन्य साधन भी आकर्षण का केंद्र बने रहे। पूरे मेला परिसर में दिनभर उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

मेले में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए एडीसीपी यमुनानगर भी पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले मेजा थाने पहुंचकर स्थानीय पुलिस अधिकारियों से मेले की व्यवस्था की जानकारी ली। इसके बाद थाना प्रभारी धनंजय पांडेय के साथ बाबा बोलन धाम पहुंचे। एडीसीपी ने मेला परिसर का निरीक्षण करते हुए श्रद्धालुओं की भीड़, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों को भीड़ पर लगातार नजर रखने, संदिग्ध गतिविधियों पर सतर्कता बरतने और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न होने देने के निर्देश दिए।

बाबा बोलन धाम को लेकर स्थानीय स्तर पर पौराणिक मान्यता भी जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडव अपनी माता कुंती के साथ मेजा क्षेत्र की पहाड़ी से होकर गुजर रहे थे। यात्रा के दौरान उन्हें प्यास लगी। कहा जाता है कि अर्जुन ने धरती पर बाण चलाया, जिसके बाद यहां जल का स्रोत प्रकट हुआ। इसी स्थान को आज बाण गंगा के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालु इसे आस्था और धार्मिक विश्वास का महत्वपूर्ण केंद्र मानते हैं।

हर वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में मेजा क्षेत्र के अलावा आसपास के जनपदों और दूर-दराज इलाकों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। रविवार को पहले दिन बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से धाम और मेला परिसर में चहल-पहल बनी रही। प्रशासन और पुलिस की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी की जाती रही। दो दिवसीय मेला सोमवार को भी जारी रहेगा।