वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर के क्षतिग्रस्त होने और सोना गायब होने संबंधी खबरों को मंदिर न्यास ने निराधार एवं भ्रामक बताया है। न्यास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि अप्रैल 2026 में मुख्य मंदिर के गर्भगृह के ऊपर वायव्य कोण पर स्थापित शिखर क्षतिग्रस्त हुआ था। क्षतिग्रस्त शिखर को मंदिर के लॉकर में यथास्थिति सुरक्षित रखा गया है।

मंदिर न्यास के अनुसार, श्री काशी विश्वनाथ धाम धार्मिक महत्त्व के साथ ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए शिखर के संरक्षण एवं मरम्मत के लिए आईआईटी मद्रास से तकनीकी परीक्षण और परामर्श प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि मंदिर की मूल संरचना और ऐतिहासिक महत्ता सुरक्षित रखी जा सके।

इस सिलसिले में आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञ टीम धाम का स्थलीय निरीक्षण कर चुकी है। टीम ने जुलाई 2026 में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में प्राकृतिक पत्थर एवं लकड़ी पर पर्यावरणीय प्रभावों से होने वाले क्षरण का उल्लेख करते हुए संरक्षण कार्य से पहले संबंधित सामग्री का सूक्ष्म विश्लेषण और आवश्यक तकनीकी जांच कराने की जरूरत बताई गई है।

न्यास के मुताबिक, विशेषज्ञ टीम द्वारा नवंबर 2026 में मुख्य मंदिर परिसर का दोबारा निरीक्षण किया जाना प्रस्तावित है। इस निरीक्षण और आवश्यक परीक्षणों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें मंदिर की संरचनात्मक सुरक्षा के साथ उसकी धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक विरासत के संरक्षण के लिए जरूरी उपाय सुझाए जाएंगे।

मंदिर न्यास ने कहा है कि शिखर के संरक्षण एवं मरम्मत से संबंधित कार्यवाही विशेषज्ञों के तकनीकी परामर्श और वैज्ञानिक पद्धति के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है। इसका उद्देश्य मंदिर की मूल संरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए आवश्यक संरक्षण कार्य संपन्न कराना है।