वाराणसी। ब्रह्मराष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास (BRE), काशी के तत्वावधान में आयोजित द्वितीय “शिवपथ द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा” श्रद्धा, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति के संदेश के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन एवं पूजन किए तथा भगवान शिव के साथ शक्ति स्वरूपा माँ संकठा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस यात्रा को विशेष एवं ऐतिहासिक बनाते हुए भारत में पहली बार द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा के दौरान विभिन्न देशों से लाए गए 140 नदियों के पवित्र जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। यह पवित्र जल विभिन्न नदियों से एकत्रित होकर यात्रा के माध्यम से ज्योतिर्लिंगों तक पहुंचा। इस पहल ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की आस्था को भगवान शिव के चरणों में समर्पित किया।यात्रा का नेतृत्व परम पूज्य श्री श्री 1008 डॉ. सचिन्द्र नाथ जी महाराज, संस्थापक अध्यक्ष, ब्रह्मराष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास एवं श्रीकुल पीठ पीठाधीश्वर, काशी के सान्निध्य में हुआ।
सभी श्रद्धालुओं को मिला प्रसाद एवं सहभागिता पत्र
यात्रा में सहभागी प्रत्येक श्रद्धालु को संस्था की ओर से सहभागिता पत्र प्रदान कर उनके समर्पण एवं सहभागिता का सम्मान किया गया। साथ ही भगवान शिव के प्रसाद स्वरूप भस्म, रुद्राक्ष की माला एवं बेलपत्र बाबा का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। यह प्रसाद केवल धार्मिक स्मृति नहीं, बल्कि यात्रा के दौरान प्राप्त आध्यात्मिक अनुभूति एवं भगवान शिव के प्रति श्रद्धा को अपने जीवन में बनाए रखने का प्रतीक रहा।
विभिन्न ज्योतिर्लिंगों पर हुआ आत्मीय स्वागत:
सोमनाथ महादेव मंदिर में BRE के संयोजक श्री बृजेश सिंह जी ने परम पूज्य महाराज जी सहित सभी श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया तथा मिश्रांबु की व्यवस्था कर सेवा का पुण्य लाभ प्राप्त किया। बैजनाथ द्वार में श्री अरविंद केशरी जी ने यात्रा में सम्मिलित श्रद्धालुओं का स्वागत किया और जलपान की व्यवस्था का दायित्व संभाला।यात्रा के अंतिम चरण में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में BRE के संयोजक Rtn. जयदीप शुक्ला जी ने श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था की तथा सभी को स्वयं जलपान कराकर सेवा एवं आतिथ्य का उदाहरण प्रस्तुत किया।
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी सहभागिता
यात्रा में छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अन्नपूर्णा जी, उनके साथ श्रीमती नरवदा जी एवं सरस्वती जी, प्रशासनिक संपर्क प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव जी, दिव्यांग पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी कृपानंद जी, श्री पुनीत जेटली जी, श्री अभय नंदन चतुर्वेदी जी (गोरखपुर), सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती चेतना पांडेय जी, प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्री विकास बरनवाल जी, पर्यावरण प्रकोष्ठ से श्री संजय बरनवाल जी, संयोजक श्री कल्लू महाराज जी, ज्योतिष प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित प्रकाश मिश्रा जी, प्रबुद्ध जन एवं परामर्श प्रकोष्ठ से श्री भारत मेहता जी, JSK Group, जिला अध्यक्ष श्री प्रताप जी सहित अनेक गणमान्यजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यात्रा में गुरु माँ प्रिया मिश्रा, कुशाग्र मिश्रा एवं आर.एन. मिश्रा साथ ही महंत जी राकेश पाण्डेय जी विशेष रूप से परम पूज्य महाराज जी के साथ सहभागी रहे।
यात्रा की व्यवस्थाओं एवं सफल संचालन में वैभव जी, संतोष जी, मलय जी, कमलेश जी, राकेश जी, रागिनी जी, हर्षिता जी, अंशिका जी, राजू जी, पवन जी, गोलू जी, अरविंद जी, सुजीत जी, सूर्यप्रकाश जी एवं प्रकाश जी, विकास जी, संदीप जी, अलोक जी, कमलेश जी, सहित अनेक कार्यकर्ताओं एवं सेवाभावी सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिव और शक्ति की आराधना का संदेश: द्वितीय शिवपथ द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, शिव-शक्ति उपासना, सेवा, एकता और विश्वबंधुत्व की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का आध्यात्मिक अभियान रही।द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के साथ माँ संकठा के दर्शन ने यात्रा को शिव और शक्ति की संयुक्त आराधना का स्वरूप प्रदान किया। वहीं विभिन्न देशों से आए 140 नदियों के पवित्र जल का भगवान शिव को समर्पण इस यात्रा का विशेष एवं ऐतिहासिक आकर्षण रहा।
ब्रह्मराष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास ने यात्रा में सहभागी सभी श्रद्धालुओं, संतों, विशिष्ट अतिथियों, संयोजकों, सेवाभावी कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा सनातन संस्कृति की उस भावना का प्रतीक है, जो भारत से विश्व को आध्यात्मिक एकता, सेवा और “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश देती है।
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