वाराणसी। सारनाथ के पावन क्षेत्र सारंगनाथ महादेव मंदिर से शुरू हुई सामूहिक रुद्राभिषेक की यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण की एक अद्भुत कहानी है जिसके ध्वजवाहक पीठ प्रमुख राहुल सिन्हा जी है। बातचीत में सामूहिक रुद्राभिषेक के उपाध्यक्ष मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि

विचार की उत्पत्ति और मूल उद्देश्य

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की एक साधारण सी नगर बैठक में इस विचार का बीजारोपण हुआ। उद्देश्य स्पष्ट था।एक ऐसा मंच तैयार करना जहाँ धर्म, समाज और परिवार तीनों का सुंदर संगम हो पाये। परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर पूजन करें, जिससे आधुनिक समय में घटते पारिवारिक जुड़ाव को मजबूती मिले।समाज को अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति की महानता से जोड़ना।जाति-पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर समाज के हर वर्ग को एक साथ एक ही स्थान पर बैठाकर पूजा-अर्चना कराना।धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से समाज सेवा और संगठनात्मक चेतना का प्रसार करना। शुरुआती ध्वजवाहक रहे डॉ राहुल भारत और उनकी समर्पित टोली किसी भी महान कार्य के पीछे समर्पित कार्यकर्ताओं की टोली होती है। इस विचार को धरातल पर उतारने का श्रेय आप और आपके निष्ठावान साथियों को जाता है। हरिशंकर सिन्हा, रमेश सिंह, नंदलाल राय और विनोद शर्मा आपकी वैचारिक सोच से इस योजना की रूपरेखा तैयार हुई।

आगे चलकर पवन कुमार सिंह, विजय त्रिपाठी उमेश राय और पार्थेश्वर सहित तमाम ऊर्जावान कार्यकर्ताओं के जुड़ने से इस संकल्प को एक सुदृढ़ ढांचा मिला। इसके बाद उत्साह का माहौल ऐसा बना कि देखते ही देखते 67 परिवारों ने सामूहिक रुद्राभिषेक के लिए अपना पंजीकरण करा लिया।

संघीय अनुशासन और नवमी तिथि का नया जोश संगठन में अनुशासन और परंपराओं का ध्यान रखना सर्वोपरि होता है। आयोजन में निर्धारित शुल्क देकर पंजीकरण करा सकते है।