फूलमंडी के सामने नगर निगम का विवादास्पद निर्माण, स्थानीय लोगों में आक्रोश

वाराणसी। आध्यात्मिक नगरी काशी में जहां कण-कण में बाबा भोलेनाथ, देवी-देवता और प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी विराजमान माने जाते हैं, वहीं भगवा रंग को मंदिरों, ध्वजों और धार्मिक प्रतीकों से जोड़ा जाता है। लेकिन अब नगर निगम द्वारा मलदहिया फूलमंडी के ठीक सामने बनाए जा रहे कूड़ाघर को भगवा रंग से पेंट किए जाने से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या यह सनातन धर्म का अपमान है या प्रशासन की ओर से स्वच्छता संदेश देने का तरीका। स्थानीय निवासियों का कहना है कि काशी के कई मंदिरों को हाल के वर्षों में भगवा रंग में रंगा गया है और प्रभु श्री राम का भगवा झंडा मंदिर प्रांगणों में फहराया जाता है। ऐसे में कूड़ाघर को भी उसी रंग में रंगना मंदिर और कूड़े के स्थान के बीच का फर्क मिटाने जैसा लगता है। मलदहिया फूलमंडी के सामने वाली सड़क पर शहर के कई इलाकों का कूड़ा डंपिंग यार्ड के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। अब इसके नवीनीकरण के दौरान पूरे ढांचे को भगवा रंग दिया जा रहा है।

लोगों का सवाल है कि नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और उच्च अधिकारियों ने यह निर्णय किसके निर्देश पर लिया, क्या सनातन धर्म को सम्मान देने वाले शहर में कूड़ाघर और मंदिर को एक ही रंग में रंगना उचित है। कई स्थानीय लोगों ने कहा कि अगर स्वच्छता का संदेश देना था तो हरा रंग ज्यादा उपयुक्त होता, जो पर्यावरण और स्वच्छता का प्रतीक माना जाता है। भगवा रंग का चयन उनके लिए समझ से परे है। काशी धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी है। यहां देवालयों और शिवालयों की भरमार है। धर्म की नगरी को भगवामय बनाना समझ में आता है, लेकिन उसी नगरी के कूड़ाघर को भी भगवा रंग देना सनातन संस्कृति के उपहास का कारण बन सकता है। नगर निगम द्वारा यह काम योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है, लेकिन फैसला लेने वाले अधिकारियों ने अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम काशी वासियों और देशवासियों को गलत संदेश दे रहा है कि कूड़ाघर और मंदिर में कोई अंतर नहीं। कई लोग इसे सनातन भावनाओं के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं। वहीं कुछ का मत है कि रंग सिर्फ सौंदर्यीकरण का हिस्सा है और इसमें कोई धार्मिक मंशा नहीं है। फिर भी, धार्मिक संवेदनशीलता वाले शहर में ऐसे फैसलों पर जनभावनाओं का ध्यान रखना जरूरी माना जा रहा है। नगर निगम प्रशासन से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। लोग मांग कर रहे हैं कि कूड़ाघर का रंग बदला जाए या कम से कम फैसले के पीछे का कारण स्पष्ट किया जाए, ताकि धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।