संदीप पांडेय की अगुवाई में लमही से खेवली तक चला अमीर गरीब सबके लिए एक समान शिक्षा की जोरदार अपील
सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने और कॉमन स्कूल सिस्टम लागू करने की मांग
वाराणसी। मैगसेसे सम्मानित विख्यात समाजसेवी डॉ. संदीप पांडेय की अगुवाई में मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही में जनसभा के बाद 13 जुलाई 2026 को “चाहे अमीर की हो या गरीब की संतान, सबकी शिक्षा हो समान” के नारे के साथ तीन दिवसीय पदयात्रा शुरू हुई। यह यात्रा शिक्षा में व्याप्त गहरी असमानता के खिलाफ और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर निकाली गई है। यात्रा मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही से जनकवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ के गांव खेवली तक पहुंची। वहां से लोकबंधु राजनारायण के गांव गंजारी होते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) पर इसका समापन होगा। लमही में ग्रामीणों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। प्रेमचंद जी की जन्मस्थली पर हुई जनसभा में वक्ताओं ने देश में जाति, धर्म, लिंग, वर्ग और आर्थिक स्थिति के आधार पर बनी गैर-बराबरियों पर चिंता जताई।
सभा में संविधान के अनुच्छेद 15 का हवाला देते हुए कहा गया कि राज्य को किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए, लेकिन वास्तविकता इससे उलट है। मुंशी प्रेमचंद के साहित्य और महात्मा गांधी की बुनियादी तालीम (नई तालीम) का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने जोर दिया कि शिक्षा सामाजिक न्याय, नैतिक चेतना और लोकतंत्र को मजबूत करने का सबसे बड़ा माध्यम है। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था खुद असमानता को बढ़ावा दे रही है। अमीर बच्चों को बेहतर स्कूल और संसाधन मिलते हैं, जबकि गरीब, किसान और मजदूर वर्ग के बच्चे निम्न गुणवत्ता वाली शिक्षा और बेरोजगारी के चक्र में फंस जाते हैं। 1968 के कोठारी आयोग की कॉमन स्कूल सिस्टम की सिफारिश आज तक लागू नहीं हुई। कई विकसित देशों (अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी आदि) और श्रीलंका, ईरान जैसे देशों ने समान शिक्षा के आधार पर अच्छी साक्षरता हासिल की, लेकिन भारत में सरकारें प्रभावशाली वर्गों के हित साधने में लगी रही हैं। यात्रा के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2015 के फैसले को लागू करने की मांग की गई, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना अनिवार्य करने का सुझाव था। इससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधरेगी और गरीब बच्चे पीढ़ी दर पीढ़ी की गरीबी तोड़ सकेंगे।
साथ ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे काकरोच जनता पार्टी के धरने का समर्थन किया गया और शिक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई। सोमवार का कार्यक्रम पद यात्रा लमही से बड़ालालपुर, नातिनियादाई, नवलपुर, तरना होते हुए खेवली पहुंची। खेवली में धूमिलज़ी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और नुक्कड़ सभा हुई, जहां जिला पंचायत सदस्य सुनील सिंह और समाजसेवी मनीष पटेल ने स्वागत किया। यात्रा रात्रि विश्राम के लिए कोरौती पहुंची। जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं हुईं और स्थानीय लोगों ने यात्रा का स्वागत किया।
डॉ. संदीप पांडेय, नंदलाल मास्टर, फादर आनंद, फादर प्रवीण, रामजनम यादव, अजित गौरव, आजाद गौतम, प्रमोद, रंजीत, गणेश, विजय, हीरा यादव, अवधेश यादव, अनिल मौर्या, मधुबाला, मनीषा, सीमा, अनीता, आशा राय, नेहा, काजल, ज्योति, सरोज सहित कई अन्य। प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग संस्थानों की लूट से परेशान आम लोगों के बीच यह यात्रा शिक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक चर्चा का केंद्र बन गई है।
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