मिर्जापुर |  विंध्याचल थाना क्षेत्र के गैपुरा चौकी अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सर्रोई के सामने बुधवार देर रात एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने हर आंख को नम कर दिया। सीमेंट से लदा बेकाबू कंटेनर सड़क किनारे बने मकान में काल बनकर घुस गया। उस समय घर के भीतर गहरी नींद में सो रहे शिव प्रसाद गुप्ता और उनका 13 वर्षीय इकलौता बेटा राहुल मौत की चपेट में आ गए। टक्कर इतनी भयावह थी कि दोनों को संभलने का अवसर तक नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उनकी सांसें हमेशा के लिए थम गईं। कुछ ही पलों में एक हंसता-खेलता परिवार बिखर गया और पूरे गांव में मातम छा गया।

मृतक शिव प्रसाद गुप्ता (36) कबाड़ का काम कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनका इकलौता बेटा राहुल क्षेत्र के सीडीएस स्कूल में कक्षा छह का छात्र था और परिवार की उम्मीदों का केंद्र था। पति और बेटे के शव देखकर मां संजू देवी बार-बार बेसुध होती रहीं, जबकि बहन दिव्या की करुण  चीखों ने हर मौजूद व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। गांव की गलियों में सिर्फ सिसकियां और मातम का सन्नाटा पसरा रहा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कंटेनर की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह एक के बाद एक चार मकानों को तोड़ता हुआ आगे बढ़ गया। कई दीवारें ढह गईं और घरों का सामान मलबे में दब गया। लोगों का कहना है कि कुछ ही सेकंड में एक परिवार की दुनिया हमेशा के लिए उजड़ गई।

सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी सिटी, थाना प्रभारी विंध्याचल, गैपुरा चौकी प्रभारी सुरेश चंद्र द्विवेदी और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। कड़ी मशक्कत के बाद दोनों शवों को मलबे से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुटी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रयागराज-मिर्जापुर मार्ग पर डिवाइडर, रिफ्लेक्टर और अन्य सड़क सुरक्षा इंतजामों का अभाव लंबे समय से बना हुआ है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई होती, तो शायद एक मासूम बेटे और उसके पिता की जान बचाई जा सकती थी।

अब गांव में हर जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल है—आखिर सड़क सुरक्षा में लापरवाही की कीमत कब तक बेगुनाह परिवार अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे? ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, निष्पक्ष जांच और इस मार्ग पर स्थायी सड़क सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि फिर किसी मां की गोद और किसी बहन का सहारा इस तरह न उजड़े।