मेजा, प्रयागराज। दो जिलों को जोड़ने वाले मदराटेला गंगा घाट पर स्टीमर संचालन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों, यात्रियों और आदिवासी समुदाय के लोगों का कहना है कि घाट पर नियमों की अनदेखी कर स्टीमर का संचालन किया जा रहा है। इससे प्रतिदिन सैकड़ों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि तय किराए से अधिक वसूली की जा रही है और विरोध करने वालों के साथ अभद्रता व मारपीट तक की जाती है।
मदराटेला गंगा घाट दोनों जिलों के बीच आवागमन का प्रमुख साधन है। प्रतिदिन मजदूर, छात्र, व्यापारी, मरीज और ग्रामीण इसी जलमार्ग से एक जिले से दूसरे जिले आते-जाते हैं। यात्रियों का कहना है कि स्टीमर का कोई निर्धारित समय नहीं है। संचालक अपनी सुविधा के अनुसार स्टीमर चलाते हैं, जिससे लोगों को घंटों घाट पर इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर स्टीमर चलाया जाता है, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
बरसात के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर बताई जा रही है। यात्रियों का आरोप है कि अधिकांश स्टीमरों पर लाइफ जैकेट, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और अन्य सुरक्षा संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि घाट पर तय किराए से अधिक धनराशि वसूली जाती है। विरोध करने पर स्टीमर कर्मियों और उनके साथ मौजूद दबंग प्रवृत्ति के लोग गाली-गलौज करते हैं। आदिवासी और कमजोर वर्ग के लोगों के साथ दुर्व्यवहार तथा मारपीट की घटनाओं की भी शिकायत सामने आई है। पीड़ितों का कहना है कि पैसे न देने पर उन्हें घाट पर रोककर प्रताड़ित किया जाता है और कई बार उनके सामान के साथ भी बदसलूकी की जाती है। शिकायत करने वालों को भविष्य में घाट पार नहीं करने देने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, इस घाट से प्रतिदिन 500 से अधिक लोग आवागमन करते हैं, लेकिन प्रशासनिक निगरानी के अभाव में कुछ लोगों ने इसे मनमानी और अवैध वसूली का माध्यम बना लिया है। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि स्टीमर संचालन को निर्धारित सरकारी नियमों के अनुसार संचालित कराया जाए, किराया सूची सार्वजनिक की जाए, समय सारिणी तय हो तथा घाट पर पुलिस और प्रशासन की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो घाट पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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