वाराणसी। जंसा और रोहनिया थाना क्षेत्र में एलआईसी में निवेश के नाम पर करीब 39 लाख 7 हजार 400 रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी, फर्जी रसीदें और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें न्याय की उम्मीद में सीधे पुलिस आयुक्त की चौखट पर पहुंचना पड़ा। पीड़ितों ने पुलिस आयुक्त को शिकायती पत्र देकर आरोपियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज करने, निष्पक्ष जांच कराने और पूरी रकम वापस दिलाने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने खुद को एलआईसी से जुड़ा बताकर अधिक मुनाफे का लालच दिया और जंसा व रोहनिया क्षेत्र के कई लोगों से लाखों रुपये निवेश के नाम पर जमा करा लिए। बदले में जो रसीदें दी गईं, उन्हें एलआईसी की बताकर भरोसा दिलाया गया, लेकिन बाद में एलआईसी कार्यालय से जानकारी करने पर कथित तौर पर पता चला कि वे रसीदें एलआईसी की नहीं बल्कि दूसरी कंपनियों की थीं।
पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने अपनी जमा पूंजी वापस मांगी तो उन्हें बार-बार यह कहकर टाल दिया गया कि अभी मैच्योरिटी पूरी नहीं हुई है। आरोप है कि 26 जुलाई 2026 को दोबारा पैसा मांगने पर आरोपियों ने अभद्रता की, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी तक दे डाली। इसके बाद स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन कार्रवाई न होने से निराश पीड़ितों ने पुलिस आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग की।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि करोड़ों के साइबर और वित्तीय अपराधों पर सख्ती का दावा करने वाली पुलिस इस 39 लाख रुपये की कथित ठगी के मामले में कब तक एफआईआर दर्ज कर आरोपियों पर शिकंजा कसती है और पीड़ितों को न्याय दिला पाती है।
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