सरकारी अस्पताल में प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं का शोषण, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

पंडित दीनदयाल अस्पताल पर बड़ा आरोप प्रशिक्षुओं पर अनुभवी स्टाफ का बोझ, मरीजों को हो रही असुविधा


वाराणसी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल में मेडिकल एवं नर्सिंग संस्थानों के प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं को नियमित कर्मचारियों के कार्य सौंपे जाने का गंभीर मामला सामने आया है। निर्धारित प्रशिक्षण के बजाय इन छात्रों को अस्पताल के विभिन्न विभागों में पूर्णकालिक ड्यूटी पर लगाया जा रहा है, जिससे न केवल उनकी ट्रेनिंग की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि मरीजों के उपचार और देखभाल में जोखिम भी बढ़ गया है। अस्पताल में वर्तमान में बी-फार्मा और डी-फार्मा के लगभग 80 प्रशिक्षु छात्र तथा तीन नर्सिंग कॉलेजों की 114 छात्राएं प्रशिक्षण ले रही हैं। इन्हें ईसीजी, पैथोलॉजी, एक्स-रे, इमरजेंसी, ट्रॉमा सेंटर और विभिन्न वार्डों में तैनात किया गया है। प्रशिक्षुओं का आरोप है कि अनुभवी स्टाफ की कमी के कारण उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। कई बार उन्हें मरीजों का ब्लड सैंपल लेने, ग्लूकोज चढ़ाने, इंजेक्शन लगाने और अन्य चिकित्सकीय कार्य भी कराए जा रहे हैं।

प्रशिक्षुओं का कहना है कि पर्याप्त मार्गदर्शन और निगरानी के अभाव में वे खुद भी दबाव में रहते हैं और मरीजों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। खासकर रात की ड्यूटी के दौरान कुछ नियमित कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी प्रशिक्षुओं पर छोड़ देते हैं, जिससे मरीजों की देखभाल का पूरा भार इन अनुभवहीन छात्रों पर आ जाता है। इससे मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर जोखिम पैदा हो रहा है। मरीजों का कहना है कि प्रशिक्षण की आवश्यकता तो है, लेकिन इसका मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कौशल कुमार सिंह ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा, कि शिकायत मेरे संज्ञान में आई है। मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपचार संबंधी सभी कार्य अनुभवी चिकित्सकों और स्टाफ नर्स की प्रत्यक्ष निगरानी में ही कराए जाने चाहिए। अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशिक्षुओं की उचित ट्रेनिंग सुनिश्चित करने और मरीजों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की जा रही है। इस मामले की जांच से यह स्पष्ट होगा कि अस्पताल में स्टाफ की कमी को प्रशिक्षुओं के माध्यम से पूरा करने की प्रवृत्ति कितनी गहरी है। यह घटना काशी जैसे धार्मिक और स्वास्थ्य सेवा के महत्वपूर्ण केंद्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को उजागर करती है। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो प्रशिक्षण का उद्देश्य ही व्यर्थ हो जाएगा और मरीजों का विश्वास गिर सकता है।