राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र सम्मेलन में पूर्व छात्रों का सम्मान, कुलपति ने विश्वविद्यालय की प्रगति में सहयोग का किया आह्वान

प्रयागराज, । उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के यमुना परिसर स्थित त्रिवेणी बहुउद्देशीय भवन में रविवार को पुरातन छात्र सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न शहरों से आए विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पुरातन छात्रों का सम्मान किया गया तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक उत्तरदायित्व और विश्वविद्यालय के विकास जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के पूर्व एमबीए छात्र डॉ. दिलीप चौरसिया ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की अपील करते हुए कहा कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई मरीज जांच रिपोर्ट को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण उन्हें आंखों की रोशनी, किडनी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है और कई मामलों में डायलिसिस तक की नौबत आ जाती है। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित कराने का भी आश्वासन दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी ताकत उसके छात्र होते हैं। उन्होंने कहा कि पुरातन छात्र अपने अनुभवों और मार्गदर्शन से वर्तमान विद्यार्थियों का भविष्य संवार सकते हैं। उन्होंने सभी पूर्व छात्रों से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, सामाजिक और संस्थागत प्रगति में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन छात्रों और विश्वविद्यालय के बीच मजबूत सेतु का कार्य करते हैं।

विशिष्ट अतिथि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के सहायक महाप्रबंधक निशांत दुबे ने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय ने उनके जीवन और करियर को नई दिशा दी। उन्होंने बैंकिंग, वित्तीय जागरूकता और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि डिजिटल युग में ऐसे सम्मेलन आपसी संवाद, सहयोग और मानवीय संबंधों को मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करते हैं।

सम्मेलन की शुरुआत पुरातन छात्र परिषद के अध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश यादव के स्वागत भाषण से हुई। इस दौरान डॉ. सुग्रीव सिंह, डॉ. हेमंत शुक्ला, डॉ. बुद्ध प्रिया, डॉ. रेवा सिंह, जे.एन. यादव, अमन गोयल, डॉ. सत्यव्रत शुक्ला, आदित्य शर्मा सहित अनेक पूर्व छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का संचालन प्रो. छत्रसाल सिंह ने किया तथा कुलसचिव कर्नल विनय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में कुलपति प्रो. सत्यकाम ने सभी पुरातन छात्रों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।