द्वारिका (गुजरात)। भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीलास्थली एवं चारधामों में से एक श्री द्वारकाधीश धाम में आज अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक परंपराओं के अनुरूप मंदिर के पवित्र शिखर पर ध्वजारोहण का दिव्य एवं ऐतिहासिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान श्री द्वारकाधीश से राष्ट्र, समाज एवं समस्त मानवता के कल्याण की मंगलकामना की।

यह पावन अनुष्ठान पूज्य श्री श्री 1008 डॉ. सचिन्द्र नाथ जी महाराज के पावन सानिध्य एवं आध्यात्मिक आशीर्वाद में श्री भरत कंजारिया जी के सौजन्य से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में  भरत मेहता, संदीप शुक्ल, महावीर सिंह, अरविन्द सिंह  सहित गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालु एवं भक्तजन श्रद्धापूर्वक उपस्थित रहे। सभी ने भगवान श्री द्वारकाधीश के दिव्य एवं भव्य दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाया।

इस अवसर पर पूज्य महाराज जी ने कहा कि द्वारकाधीश मंदिर का ध्वज केवल मंदिर की शोभा नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अखंड चेतना, सत्य, सेवा, समर्पण और धर्म विजय का प्रतीक है। जब तक धर्म का ध्वज ऊँचा लहराता रहेगा, तब तक मानवता में करुणा, संस्कृति में चेतना और राष्ट्र में आत्मगौरव बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि आज के समय में आवश्यकता केवल मंदिरों के शिखरों पर ध्वज फहराने की नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय के हृदय में धर्म, सदाचार, सेवा और राष्ट्रभक्ति का ध्वज स्थापित करने की है। यही सनातन संस्कृति का मूल संदेश है और यही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य भी है।

ध्वजारोहण के उपरांत विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि, परिवारों के सुख-समृद्धि, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य तथा "वसुधैव कुटुम्बकम्" की भावना के सशक्त विस्तार के लिए विशेष प्रार्थना की गई।

कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में धर्म, संस्कार, सेवा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता एवं मानवीय मूल्यों को अपनाते हुए सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

"धर्मो रक्षति रक्षितः" के उद्घोष एवं "जय श्रीकृष्ण" तथा "जय श्री द्वारकाधीश" के जयघोष से सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।