वाराणसी। किसान काँग्रेस उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता /उपाध्यक्ष संजय चौबे ने शुक्रवार को प्रेस को भेजी विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि देश में काँग्रेस शासन के दौरान 1980 से लेकर 1989 1990 से 1995 तक य़ा 1989 से 1990 ,1996 तक गूगल औऱ चैट जी पी टी से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार कोई लीक की बड़ी घटना रिपोर्टः नहीं की गया। 1997 तक य़ा 1998 से 1999 ,1999 से 2004 तक जब IIT, PMT की परीक्षा होती थी तब पेपर लीक की घटनायें नाम मात्र की होती थी औऱ गूगल य़ा चैट जी पी टी के माध्यमों से यदि रिकार्ड को खंगाला जाय तो पता चलता है की इंदिरा ,राजीव बी पी सिंह चंद्रशेखर नरसिंहा राव तक पेपर लीक का रिकार्ड उपलब्ध नहीं मिलता है। 

चौबे ने कहा की इसकी शुरुवात 1997 से हुई लेकिन वो भी बहुत् सीमित थी तब शिक्षा व्यवस्था, कोचिंग फीस ,फार्म फीस आज की अपेक्षा काफी सस्ते थे यह क्रम लगभग 2013 तक चला इस बीच परीक्षाओं का नाम भी बदला IIT ,PMT से JEE,AIPMT हो गया लेकिन पेपर लीक समस्या नाम मात्र की थी लेकिन 2013 में सरकारों ने इसे लेकर सख्त रुख अपनाया औऱ कई कड़े कानून बनाये गये लेकिन व्यवस्था इसी तरह चलती रही 2014 के बाद सत्ता में आयी मोदी सरकार ने इन परीक्षाओं का नाम बदल कर NEET (नेशनल इलेजिबीलीटी इंट्रेंस टेस्ट )कर दिया भाषणों में कहा कि कड़ी व्यवस्था कर दी गयी है औऱ पूरे देश में एकही परीक्षा होगी जिससे बच्चों का समय औऱ खर्च दोनों बचेगा हुआ इसका उल्टा उस समय तक शिक्षा महंगी हो चुकी थी खर्च भी बढ़ गये थे लेकिन पेपर लीक की समस्या बढ़ती गयी इसके बाद 2017 में सरकार ने परीक्षा कराने की जिम्मेदारी NTA को सौंप दी जो की 1860के तहत एक रजिस्टर्ड संस्था है इसके बाद तो पेपर लीक की बाढ़ सी आ गयी औऱ गूगल औऱ चैट जी पी टी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 89 से 90 बार पेपर लीक हुये जो की आजादी के बाद एक रिकार्ड कायम कर गये सोशल मीडिया से प्राप्त रिकार्ड औऱ नेताओं के आरोप को आधार माना जाय तो 2014 से 2026 तक 152 बार पेपर लीक हुए जो की किसी भी देश के लिये शर्मनाक है। 

चौबे ने कहा कि परीक्षा तैयारी कोचिंग फीस औऱ अन्य संसाधनों को आधार माना जाय तो पेपर लीक से कई करोड़ छात्रों का भविष्य बर्बाद हुआ औऱ छात्रों की पिता की गाढ़ी कमाई प्रत्येक साल खर्च हुई जो लगभग देश द्वारा शिक्षा पर खर्च जी डी पी के लगभग बराबर है। 

चौबे ने कहा कि जब जब पेपर लीक हुए सरकार ने दावा किया कि मास्टर माइंड पकड़ लिये गये है कड़ी सजा़ दी जायेगी।

चौबे ने सवाल किया कि जब हमेशा मास्टर माइंड पकड़ लिये गये तो फिर प्रत्येक साल मास्टर माइंड पेपर लीक कराने कहा से आ जा रहे है ? इसका जवाब सरकार को देना चाहिये लेकिन सरकार जवाबदेही न तय करती है न लेती है । इसका अर्थ है कि सही अभियुक्त कभी पकड़े नहीं गये इसके क्या कारण थे अभियुक्तों को कौन बचा रहा था औऱ अभियुक्त आज तक पकड़ से बाहर क्यों है औऱ पेपर लीक धड़ल्ले से हो रहे है।

चौबे ने कहा कि पेपर कराने वाली एजेंसी से पेपर कराने की पहल किसने की थी ? यह भी जाँच का विषय है हाला कि यह शुद्ध रूप से शिक्षा मंत्रालय का मामला है औऱ शिक्षा मंत्रालय की शोभा कई मंत्री बढ़ा चुके है औऱ जल्दी ही उनकी छुट्टी भी हो गयी सबसे लंबे समय से धर्मेंद्र प्रधान जी टिके हुए है।

क्या शिक्षा माफियाओं की पकड़ इतनी बड़ी थी कि अन्य मंत्रियों की विदाई जल्दी हो गयी ? लेकिन प्रधान जी की विदाई नहीं हो पा रही है औऱ सभी मंत्रियों के समय प्रधानमंत्री तो मोदी जी ही थे लेकिन पेपर लीक रोक नहीं पा रहे है औऱ छात्र औऱ विपक्ष के बड़े आंदोलन के बाद भी न हीं शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा ले पा रहे है जबकि छात्रों के जंतर मंतर के आंदोलन के बाद संसद मार्च में पुलिस ने पेलेट गन आंसू गैस के गोले छोड़े ,बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए स्थिति नियंत्रण में तो है लेकिन पुलिस सरकार औऱ छात्रों के बीच तनाव बना हुआ है। 

सरकार ने अभी तक न तो NTA को भंग किया है न ही कुछ बड़े कदम उठा पायी जिससे छात्रों का गुस्सा शांत हो जबकि पेपर लीक के कारण देश के 21 होनहार छात्र आत्महत्या कर चुके है लेकिन सरकार जिद्द पर अड़ी हुई है पेपर लीक से देश का बड़ा नुकसान हुआ है। सरकार आंदोलन में शामिल छात्रों से मुकदमा तुरंत वापस करें। 

चौबे ने कहा कि उपरोक्त बिंदुओं से स्पष्ट है कि पूरी दाल ही काली इस लिये सभी जिम्मेदारी से भाग रहे है। यदि देश में युवाओं औऱ शिक्षा व्यवस्था के बीच विश्वास पैदा करना है तो मोदी जी खुद धर्मेंद प्रधान को बर्खास्त करें औऱ पूरे मामले की जाँच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जे पी सी से कराये जिससे दूध का दूध पानी का पानी हो जाए।